संदिग्ध हालात में और जहर से हुई मौत मामलों में विसरा काफी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि समय से विसरा लैब नहीं पहुंचा तो रिजल्ट प्रभावित हो सकता है। कॉज ऑफ डेथ के बारे में सही जानकारी मिलने में मुश्किल हो जाती है। विसरा को लेकर कई बार पुलिस महकमा गंभीर नहीं रहता है और देर से सैंपल जांच के लिए भेजे जाते हैं। इस साल नवंबर तक 72 लोगों के मौत का राज जानने के लिए विसरा लैब भेजे गए हैं। मोर्चरी से विसरा ले जाने के बाद पुलिस सैंपल को लैब में भेजने में लापरवाही बरतती है।
पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के बाद विसरा को लेकर गंभीर नहीं रहती है। सूत्रों के अनुसार कई बार पुलिसकर्मी विसरा को थाने के मालखाने में रख देते हैं। ऐसा ही मामला सदर थाना का हाल में आया था। तीन माह बाद पुलिस विसरा का डिब्बा बदलने के लिए मोर्चरी पहुंचा। इसी प्रकार महेंद्रगढ़ थाने की पुलिस एक मामले में कपड़े बदलवाने एक साल बाद मोर्चरी पहुंची। वहीं, कनीना थाना पुलिस दो केस नारनौल में कराए थे। दोनों मामलों का विसरा भेजे जाने हैं। हाल में पुलिसकर्मी एक विसरा लेकर गया। एक मामला राजस्थान पुलिस का लंबे समय से पेंडिंग है।
जिले में पोस्टमार्टम की सुविधा जिला नागरिक अस्पताल नारनौल व उप नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में उपलब्ध है। जिला नागरिक अस्पताल में इस साल नवंबर तक 227 लोगों के पोस्टमार्टम हुए हैं। इस दौरान 72 लोगों के विसरा जांच के लिए गए है। इसमें से पांच के विसरा लैब भेजे जाने हैं। डॉक्टरों का मानना है कि विसरा जितना जल्द लैब को भेज दिया जाए, बेहतर होता है।
देर से भेजने पर रिजल्ट प्रभावित हो सकता है। जिला अस्पताल के फोरेंसिक एक्सपर्ट व मोर्चरी प्रभारी डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि जून 2018 में नारनौल में कार्य संभाला था। उन्होंने बताया कि पिछले साल 147 पोस्टमार्टम हुए थे। जिसमें से 45 विसरा भेजे जा गए थे। कार्य संभालने के बाद काफी पेंडिंग बिसरा भेजे गए थे। इस साल नवंबर तक 227 पोस्टमार्टम हुए, जिसमें में 72 लोगों के विसरा लिए गए हैं। हालांकि जांच रिपोर्ट थाने में भेजी जाती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट फ्रीज होने पर मैसेज जाता है आईओ के पास
फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऑनलाइन तैयारी होती है। उन्होंने बताया कि इसमें जांच अधिकारी का भी नंबर फीड होता है। ऐसे में रिपोर्ट तैयार होने के बाद जैसे ही उसे फ्रीज किया जाता है मैसेज जांच अधिकारी के मोबाइल नंबर पर चला जाता है। वहीं, मैसेज रिपोर्ट तैयार करने वाले मेडिकल अधिकारी के पंजीकृत ईमेल पर भी चली जाती है। इससे सभी को पता चल जाता कि रिपोर्ट तैयार है। इससे पुलिस को पोस्टमार्टम हाउस का बार-बार चक्कर नहीं काटना पड़ता।
दो प्रकार की होती है जांच
फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि कुछ मौतों की जानकारी लेने के लिए विसरा के दो प्रकार सैंपल लिए जाते जाते हैं। इसमें एक केमिकल टेस्ट होता है। इसमें जहर निगलने से हुई मौत, शराब से हुई मौत, ड्रग्स व अन्य केस शामिल रहते हैं। दूसरा हिस्ट्रो पैथोलॉजी टेस्ट कराया जाता है। इस जांच से यह पता चलता है कि मौत किस कारण से हुई। जैसे बीमारी, मरते समय शरीर में क्या बदलाव हुआ, बेसिकली इससे शरीर की पैथोलॉजी की जानकारी मिलती है। कई बार मौत के कारण जानने के लिए दोनों प्रकार के जांच कराएं जाते हैं।
दो जगहों पर होती है जांच
नारनौल के विसरा जांच के लिए केमिकल को सुनारिया और हिस्ट्रो पैथोलॉजी के लिए रोहतक पीजीआई भेजे जाते हैं। प्रदेश में प्रमुख लैब मधुबन में है। इसके अलावा रीजनल लैब सुनारिया रोहतक व भोंडसी गुरुग्राम में है।
विसरा भेजने के लिए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जा रहा है। इससे विसरा भेजने के कार्य में तेजी आई है। कई बार सर्वर के कारण दिक्कत होती है। पहले विसरा भेजने में पेंडेंसी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हर माह थाना स्तर से पेंडेंसी की रिपोर्ट ली जाती है। कुछ मामले में ऑब्जेक्शन के कारण देरी हुई है। यदि विसरा भेजने में पुलिस कर्मियों ने कोताही बरती तो कार्रवाई की जाएगी।
- दीपक सहारण, एसपी नारनौल
साल 2019 में नवंबर तक
कुल पोस्टमार्टम- 227
विसरा लिया- 72
केमिकल जांच- 37
हिस्ट्रो पैथोलॉजी जांच - 6
केमिकल व पैथोलॉजी - 29