कनीना। कनीना के वार्ड एक निवासी डॉ. होशियार सिंह 33 वर्षों से साइकिल पर सभी दैनिक जीवन के कार्य करते हैं। विज्ञान अध्यापक 50 वर्षीय डाॅ. होशियार ने 1988 में साइकिल चलाना सीख लिया था। इसके बाद वर्ष 1990 से वे लगातार दैनिक कार्यों में साइकिल प्रयोग कर रहे हैं। प्रतिदिन 20 से 30 किलोमीटर दूरी साइकिल से तय करते हैं।
सर्दी हो या फिर गर्मी, आंधी हो या बारिश लेकिन होशियार सिंह ने दैनिक कार्यों में साइकिल का प्रयोग करना जारी रखा। वर्ष 1995 से स्कूल में विज्ञान शिक्षक के रूप में तैनात हुए। जहां तक संभव हो पाया हर विद्यालय में साइकिल से ही जाते रहे हैं। होशियार सिंह शिक्षक होने के साथ-साथ एक अच्छे साहित्यकार भी है। अब तक 38 कृतियों की रचना की है तथा देश-विदेश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख भी 30 वर्षों से लेखन कार्य में उन्हें सैकड़ों अवाॅर्ड मिले हैं तथा लेखन कार्य में करीब 700 प्रमाणपत्र हैं।
साइकिल का क्यों लेते हैं सहारा
डाॅ. होशियार सिंह बताते हैं की साइकिल बहुत अच्छा साधन है स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए विदेशों में जहां अमीर लोग साइकिल पर चलते हैं वही भारत जैसे देश में उल्टी धारणा बन गई है कि अमीर लोग वाहनों में और गरीब लोग साइकिल आदि पर चलते हैं। उनका कहना है कि उनके पैरों में किसी प्रकार का दोष नहीं है। उनका मानना है कि यदि पूरे ही देश में कम से कम सप्ताह में एक बार साइकिल पर चले तो बहुत अधिक पेट्रोल की बचत हो सकती है या किसी सार्वजनिक वाहन से यात्रा करें तो भी पेट्रोल की बचत हो सकती है। कोरोना काल में वाहनों पर प्रतिबंध लग गया तब भी उनकी साइकिल लगातार चलती रही। लंबे समय से साइकिल चला रहे हैं कनीना के इतिहास में इतनी लंबी साइकिल चलाने वाले एकमात्र है। उनका कहना है कि साइकिल चलाने पर उनके लोगों के ताने भी सुनने पड़ते हैं कोई कहता है धन बचाता है तो कोई कहता है दिखावा नहीं करना चाहता।