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महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों का लाभ उठाएं : संतोख सिंह

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फोटो नंबर- 16शकुंतला देवी।
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नारनौल। जिला बार एसोसिएशन प्रधान संतोख सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए अनेक सख्त नियम बनाए गए हैं लेकिन जागरूकता के अभाव में कानूनी सुविधा का लाभ नहीं उठा पाती हैं। अपराध के खिलाफ सख्ती से आवाज उठानी चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
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संतोख सिंह मंगलवार को अमर उजाला की तरफ से कार्यालय में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में महिलाओं व युवतियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. कृष्णा आर्य ने किया।
डॉ. कृष्णा आर्या ने कहा कि आधुनिक समय में महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं लेकिन रूढ़ीवादी सोच के कारण महिलाओं को कई परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। उन्होंने महिला सुरक्षा संबंधित विषय पर भी उपस्थित महिलाओं को जानकारी दी। कार्यक्रम के समापन पर महिलाओं ने गीत गाकर महिला उत्थान का संकल्प लिया।
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यह महिलाएं रहीं उपस्थित
अपराजिता कार्यक्रम में शोभा शर्मा, सरोज कश्यप, संयोगिता शर्मा, आर्या अरुणा जांगड़ा, शकुंतला यादव, सिलोचना, रेनू आर्या, सरोज कश्यप, श्वेता, निर्मल जिंदल, डॉ. राजवंती यादव, गीता गोयल, संगीता शर्मा, नीता गुप्ता, मधू गोयल, उषा यादव, सरिता यादव, नीलम यादव और सरिता जांगिड़, मिलन सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।

मोबाइल लील रहा बच्चों के संस्कार
अपराजिता कार्यक्रम में अनेक महिलाओं ने अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन बच्चों के संस्कार छीन रहा है जिससे बच्चों में क्रोध, बदले की भावना और आपराधिक मानसिकता को बढ़ावा मिल रहा है।
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हमें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए जिससे उनमें बड़ों और महिलाओं के प्रति आदर के भाव पैदा कर सकें। संस्कारों में कमी के कारण ही महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं। -शकुंतला यादव
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पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को हमेशा से कम आंका जाता है। बेटी, पत्नी और मां के रूप में महिलाओं से बेहतर होने की उम्मीद की जाती है लेकिन महिलाओं की खुशियों व सम्मान पर ध्यान नहीं दिया जाता। -मिलन

बच्चे ही बड़े होकर समाज का निर्माण करते हैं लेकिन आज के भाग-दौड़ भरे दौर में माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते। इस कारण बच्चों का मानसिक विकास नहीं हो पाता। आज के दौर में किशोर अवस्था में ही बच्चे आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं। -सरिता जांगिड़

महिला सुरक्षा व उत्थान के लिए अनेक कानून बनाए गए हैं लेकिन अभी भी समाज में महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। सड़क पर चलते हुए महिलाएं छेड़खानी का शिकार हो रही हैं इसलिए सख्त कानून बनाने के साथ-साथ उनका सख्ती से पालन भी आवश्यक है। -श्वेता शाह

जब मैं गांव की सरपंच थी तब मेरे गांव की एक महिला घरेलू हिंसा की शिकार थी और पति की पिटाई से बचने के लिए उसने मुझसे मदद मांगी। मैंने उससे समझाया कि घरेलू हिंसा का विरोध करो और अपने पति के अत्याचार को सहन करना बंद करो। इसके बाद महिला ने हिम्मत दिखाते हुए पति की घरेलू हिंसा का विरोध किया और आज खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही है। -सरिता, पूर्व सरपंच
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