नारनौल। प्रगतिशील टैगोर स्वयं सहायता समूह इन दिनों चर्चा का विषय बना है। समूह ने अब तक 300 से अधिक महिलाओं को रोजगार दिया है।
बनारसी देवी गांव बवानिया की रहने वाली है और प्रगतिशील टैगोर स्वयं सहायता समूह उनके नेतृत्व में ही आगे बढ़ रहा है। स्वयं सहायता समूह की यात्रा वर्ष 2001 में शुरू हुई जब बनारसी देवी ने अपने गांव की महिलाओं को संगठित कर आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा। इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने प्रगतिशील टैगोर स्वयं सहायता समूह की नींव रखी।
2005 से इस समूह की विकास यात्रा ने गति पकड़ी। वर्ष 2017 में समूह को औपचारिक रूप देते हुए उन्होंने पहला कदम उठाया। उन्होंने गांव की महिलाओं को अचार बनाने का कौशल सिखाया। इस शुरुआती सफलता से उत्साहित होकर समूह की महिलाओं को करनाल स्थित बागवानी प्रशिक्षण संस्थान में उन्नत प्रशिक्षण के लिए भेजा जहां उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग के गुर सीखे।
हरियाणा सरकार के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का सहयोग समूह के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। योजना के तहत 2021 में समूह को दाल प्रसंस्करण के लिए एक मिनी दाल मिल उपलब्ध करवाई गई। धीरे-धीरे समूह ने गतिविधियों का विस्तार किया। महिला किसान संगठन से जुड़कर मोटे अनाज और ऑर्गेनिक उत्पादों के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया।
समूह की महिलाओं ने बाजरे, ज्वार, रागी से बने स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद जैसे बाजरा खिचड़ी, बेसन, हल्दी व मसाले, तेल और गुड़ तैयार करना सीखा। इस समूह में प्रधान भागवंती, सचिव कृष्णा देवी, कोषाध्यक्ष रेखा देवी, चलती, माया, सविता, मंजु, राजबाला, सुमन, सुषमा, रेनू यादव, गायत्री, सविता, रेनू देवी, संतोष, ललिता देवी जैसी कई सशक्त महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।