महेंद्रगढ़। दक्षिणी हरियाणा और अहीरवाल की राजनीति में पकड़ रखने वाली महेंद्रगढ़ यादव सभा चुनाव को लेकर दो धड़ों में बंट चुकी है।
एक धड़ा वर्तमान में चल रही चुनावी प्रक्रिया को जायज ठहराते हुए चुनाव कराने पर अड़ा है तो दूसरा चुनावी प्रक्रिया में संस्थापक सदस्यों को वोट के अधिकार देने के पक्ष में है। एक धड़े ने सभा की गत चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि 26 सितंबर को नोटिस लगाकर चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। इसके बाद 16 से 18 अक्तूबर से शुरू हुई नामांकन को लेकर सभा दो धड़ों में बंट गई थी।
बता दें कि इस बार जन्माष्टमी पर भी वर्तमान विधायक कंवर सिंह यादव ने स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के सामने ही सभी की वर्तमान कार्यकारिणी पर पार्टी विशेष से संबंधित होने की बात कही थी। साथ ही कार्यकारिणी पर भाजपा सरकार की ओर से सभा के लिए जारी की गई अनुदान राशि के बोर्ड छिपाने का आरोप लगाया था।
वहीं अब स्टेट रजिस्ट्रार (फर्म्स व सोसाइटीज) हरियाणा ने यादव सभा के संस्थापक सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से दायर की गई अपील पर सुनवाई करते हुए वीरवार को अंतरिम आदेश जारी कर सभा की वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। स्टेट रजिस्ट्रार की ओर से अब इस मामले की सुनवाई के लिए 24 नवंबर की तारीख निश्चित की गई है। संस्थापक सदस्यों के एक शिष्टमंडल ने जिला रजिस्ट्रार के पारित आदेश में खामियों को आधार बनाकर स्टेट रजिस्ट्रार को अपील की थी।
जिला रजिस्ट्रार ने मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा तय दिशा-निर्देशों में तब्दीली करते हुए नामांकन शुरू होने के अगले दिन एक आदेश पारित किया जिससे सभा के दो पक्ष आमने-सामने हो गए। चुनावी प्रक्रिया के बीच में इस प्रकार के आदेश से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और धीरे-धीरे चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते गए।
बता दें कि यादव सभा महेंद्रगढ़ पूरे दक्षिणी हरियाणा के अहीरवाल की राजनीति पर विशेष पकड़ रखती है। तीन दशक से अहीरवाल की राजनीति तय करने में बड़ी भूमिका निभा रही है। लंबे समय से सर्वसम्मति से चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाती रही है। इसमें अहीरवाल के बड़े नेताओं का भी अंदर खाते से हस्तक्षेप रहता है। हालांकि इस बार भी अहीरवाल के बड़े नेताओं की इस चुनाव प्रक्रिया पर पैनी नजर बनी हुई है लेकिन सभी के अपने-अपने उम्मीदवार होने के कारण सहमति नहीं बनने से सर्वसम्मति की बजाए चुनावी प्रक्रिया से पदों नियुक्ति होनी तय मान रहे हैं।
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सर्वसम्मति से चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद
संस्थापक सदस्यों के शिष्टमंडल में शामिल चेयरमैन सुरेंद्र बैरावास, प्रवीण सिसोठ, अनिल भगड़ाना और एडवोकेट सुरेंद्र सीगड़ा ने बताया कि इसी संदर्भ में सभा के संस्थापक सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने गत बुधवार को भी बैठक कर जिला और स्टेट रजिस्ट्रार को वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने और संस्थापक सदस्यों को कॉलेजियम से चुनकर आए सदस्यों के समान मानने की मांग उठाई थी। स्टेट रजिस्ट्रार के इस अंतरिम आदेशों के बाद अब फिर से एक बार सभा की गवर्निंग बॉडी सर्वसम्मति से चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद जगी है।
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नियमों को ताक पर रखने का आरोप
वहीं इस मामले में दूसरी तरफ सभा के संस्थापक सदस्य प्रदीप बालरोड़िया, सतवीर सरपंच, शुभराम यादव, एडवोकेट राजकुमार यादव ने बताया कि कई साल से कुछ प्रभावशाली लोग नियमों को ताक पर रखकर सभा के चुनाव को प्रभावित करके कार्यकारिणी का बना रहे थे जिसको लेकर पिछले चुनाव में भी शिकायत की गई। इस बार चुनाव प्रक्रिया बिल्कुल सही तरीके से चल रही है। सभा चुनाव की निष्पक्षता पर कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों के कारण सवाल खड़ा कर रहे हैं। निष्पक्ष चुनाव होने से एक विशेष समूह की सत्ता यादव सभा से जाती हुई नजर आ रही है। इसलिए कुछ लोग चुनाव में अवरोध पैदा करने की नीयत से झूठी शिकायत कर रहे हैं उन्होंने हरियाणा सरकार से निष्पक्ष चुनाव को संपन्न कराने की मांग की है।