महेंद्रगढ़। महाराणा प्रताप चौक के नजदीक स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान के सभागार में वीरवार को आशुकवि पंडित बालमुकुंद की स्मृति में पहली पुण्यतिथि पर हरियाणा और राजस्थान के आशुकवियों को सम्मानित किया गया।
लोककवि दलबीर फूल लिसान और शुभराम शास्त्री खालेटा को साहित्य संस्कृति संघ द्वारा आशुकाव्य शिरोमणि पुरस्कार व आशुकाव्य गौरव पुरस्कार तथा सम्मान राशि से नवाजा गया। संघ की ओर से विजेता आशुकवियों को एक प्रमाणपत्र, सम्मान राशि और स्मृति चिह्न से सम्मानित किया गया।
सुधीर दीवान की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य संस्कृति संघ के अध्यक्ष मित्र राधेश्याम गोमला की देखरेख में सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध सांगी बाबूदान सिंह चौहान थे। बाबूदान सिंह चौहान ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य साहित्य की दुर्लभ विधा आशुकाव्य को जिंदा रखना है। यह दुर्लभ विधा आशुकाव्य हरियाणा और राजस्थान के अतिरिक्त अन्य बहुत कम देखने को मिलती है ।
अध्यक्ष सुधीर दीवान ने कहा कि इस विधा की खास बात यह है कि इसमें प्रतिभागी कवि को विषय दिया जाता है और अधिक से अधिक आधा घंटा में कवि को संबंधित छंद के अनुरूप रचना तैयार करनी होती है ।
कार्यक्रम के आयोजक राधेश्याम गोमला बताया कि पिछले तीन महीनों से आशुकवियों के कवि सम्मेलनों काव्य प्रतियोगिताओं ग्रुपों और यूट्यूब चैनलों पर प्रसारित कार्यक्रमों के माध्यम से विजेताओं के चयन की प्रक्रिया चल रही थी। इस अवसर पर मुकेश कुमार शर्मा, डॉक्टर संदीप शर्मा, वेदप्रकाश भारती, रामकिशन शर्मा, बाबूलाल शर्मा, हैड मास्टर सुंदरलाल, जय भगवान, नेमिचंद शांडिल्य, हनुमान सिंह, कपिल शर्मा, डॉक्टर शिवराज सिंह, शंभूदयाल शर्मा आदि साहित्य कारों ने विधा को जिंदा रखने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।