भले ही प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा कर रही है लेकिन हकीकत कोसों दूर है। जिला अस्पताल में दो वर्षों से फिजिशियन तथा तीन महीने से गायनोलॉजिस्ट तथा बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसके अलावा मेडिकल ऑफिसर के पद भी खाली हैं।
इस अस्पताल के अंतर्गत महेंद्रगढ़ एवं हरियाणा की सीमा के साथ लगते राजस्थान राज्य के गांवों को मिलाकर लगभग 400 गांव अस्पताल के अंतर्गत आते हैं। मरीज 80 किलोमीटर दूर से इलाज के लिए बहुत उम्मीद के साथ आते हैं लेकिन मरीजों को यहां सुुविधाएं नदारद मिलती हैं। जिला अस्पताल में प्रति माह 25 से 30 हजार ओपीडी होती है। वहीं अस्पताल में प्रति माह लगभग 350 डिलवरी हो रही हैं। इनमें लगभग 150 केस ऑपरेशन के होते हैं। वहीं बाल विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से अस्पताल की ओपीडी पहले की तुलना में 50 प्रतिशत कम हो गई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को निजी अस्पतालों को सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहना कि कि सरकार के पास अस्पताल के लिए डिमांड भेजी हुई है।
दो वर्षों से अधिक समय से नहीं फिजिशियन
फिजिशियन के बिना अस्पताल चलना संभव नहीं होता। हर प्रकार बीमारी का इलाज वही करता है। सबसे पहले मरीज उसी को दिखाता लेकिन सरकारी अस्पताल में तो कोविड से पहले फिजिशियन नहीं है। फिजिशियन नहीं होने की वजह से मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशानी उठानी पड़ती है। कई मरीज तो दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम तथा रोहतक जाना पड़ता है।
42 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का हो रहा है सीजेरियन
जिला अस्पताल में तीन महीने से स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। केवल ऑन कॉल निजी अस्पताल से महिला चिकित्सक बुलाया जाता है। जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक कितना जरूरी है ये तीन महीने के आंकड़ों से पता चलता है। 42 प्रतिशत महिलाओं की डिलवरी ऑपरेशन से होती है। जिले में प्रति माह में लगभग 350 डिलवरी हो रही हैं इनमें 150 केस ऑपरेशन के होते हैं। इनमें लगभग 30 केस गंभीरता को देखते हुए रेफर कर दिए जाते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ की कमी, ओपीडी हुई आधी
तीन महीने पहले अस्पताल में दो-दो बाल रोग विशेषज्ञ होते थे। उस समय अस्पताल में बच्चों की ओपीडी औसत 200 से अधिक होती थी मगर अस्पताल के दोनों चिकित्सक त्याग पत्र देकर चले गए। अब मात्र एक बाल रोग विशेषज्ञ महेंद्रगढ़ से डेपुटेशन पर लगाया हुआ है। चिकित्सक की कमी की वजह से ओपीडी 50 प्रतिशत यानी 100 ओपीडी प्रतिदिन रह गई है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग हमने भेजी हुई है। पद भरने का कार्य सरकार है तब तक हमने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए ऑन कॉल स्त्री रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था की हुई है और बाल रोग विशेषज्ञ एक चिकित्सक डेपुट किया हुआ है।
-डॉ. आशा शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक।