प्रदेश में विभिन्न कार्यालयों और रिहायशी भवनों की छप पर अब 8 लाख रुपये में रूफ टॉप सोलर प्लांट लगवा सकेंगे। इसके लिए नवी एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार ने सोलर प्लांट की दरों में संशोधन किया है।
प्लांट लगवाने के इच्छुक नागरिक डीआरडीए में संपर्क कर सकते हैं। केंद्रीय नवी एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय प्रदेश में सरकारी/वाणिज्य/शैक्षणिक/रिहायशी/औद्योगिक भवनों की छतों पर 5 मेगावाट क्षमता तक के रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट लगवाता है।
अतिरिक्त उपायुक्त आरएस वर्मा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में सरकारी/वाणिज्य/शैक्षणिक/रिहायशी/औद्योगिक भवनों की छतों का प्रयोग सोलर पावर प्लांट लगाकर किया जाएगा।
ये सोलर पावर प्लांट बिना बैटरी के होंगे। दिन के समय जब इन रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट से जो पावर उत्पन्न होगी उसका प्रयोग उस बिल्डिंग में प्रयोग होने वाली पावर के तौर पर होगा। ऐसा सिस्टम डिजाइन किया जाएगा इससे यदि आवश्यकता से अधिक पावर उत्पादन होता है तो अधिक पावर ग्रिड को सप्लाई हो जाएगी।
ऐसा रहेगा सोलर प्लांट का स्वरूप
एडीसी ने बताया कि पावर प्लांट स्थापित करने की दरों में संशोधन किया है। 10 किलोवाट का पावर प्लांट अब लगभग 8 लाख रुपये में स्थापित होगा। पहले इसकी कीमत 10 लाख थी। अर्थात एक किलोवाट पावर प्लांट स्थापित करने पर अब 80 हजार रुपये का खर्चा आएगा।
10 किलोवाट से 500 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट, 90,000 रुपये प्रति किलोवाट की दर से स्थापित होगा। इस प्रोजेक्ट की दो कैटेगरी निर्धारित की गई हैं। पहली कैटेगरी में वे मालिक शामिल हैं, जो रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट स्वयं स्थापित करवाएंगे।
उन्हें 30 प्रतिशत या 27 रुपये प्रति वाट जो भी कम होगा के अनुसार अनुदान दिया जाएगा। अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि सरकारी/वाणिज्य/शैक्षणिक/रिहायशी/औद्योगिक भवनों की छतों पर जो भी मालिक रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट स्थापित करवाना चाहता है। वे तुरंत अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में संपर्क करें।