फोटो नंबर-04अनाज मंडी की रामलीला में फुलवारी की लीला का मंचन करते कलाकार।
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नारनौल। जनक की फुलवारी में फूलों की महक थी, हवा में पूजा की पावन गंध थी। गुरु विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण पुष्प लेने बाग में पहुंचे ही थे कि तभी सखियों संग गौरी पूजन को आईं सीता सामने आ गईं। नजरें मिलीं, पल ठहर गया, और एक पल को मानो समय भी थम गया। मंच पर राम-सीता के इस पहले मिलन का दृश्य उतरा तो पूरा पंडाल मंत्रमुग्ध होकर देखता रह गया।
भगवान नारायण सेवा संस्था की ओर से श्री कृष्णा ड्रामेटिक क्लब, अनाज मंडी के मंच पर आयोजित रामलीला के तीसरे दिन शुक्रवार रात सुबाहु-मारीच वध, अहिल्या उद्धार, फुलवारी और जनक संदेश की लीलाओं का मंचन किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि मुख्य अतिथि बृजमोहन गर्ग और प्रेमचंद गुलाटी ने गणेश पूजन और रिबन काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
लीला में इससे पहले दिखाया गया कि ताड़का वध की खबर मिलने पर सुबाहु और मारीच श्रीराम-लक्ष्मण से युद्ध करने पहुंचे। युद्ध में सुबाहु मारा गया, जबकि मारीच भाग गया। इसके बाद श्रीराम ने अपने चरणों का स्पर्श कर गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार किया। आगे राजा जनक की ओर से सीता स्वयंवर का निमंत्रण पहुंचने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
श्रीराम की भूमिका ध्रुव वर्मा, लक्ष्मण की कनिष्क कोहली, मारीच की महावीर, सुबाहु की जगदीश बिल्ला और अहिल्या की भूमिका सतीश बेदी ने निभाई। मंच संचालन भारत भूषण तायल ने किया। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के प्रभारी दयानंद सैनी सहित संस्था के सदस्य मौजूद रहे।