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Mahendragarh-Narnaul News: 16 जनवरी से बजेगी शहनाई, मलमास होगा खत्म

Sun, 12 Jan 2025 06:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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महेंद्रगढ़। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन विष्कुंभ योग, बालव व कौलव करण और पुनर्वसु नक्षत्र का योग रहेगा। इसके अलावा इस दिन भौम पुष्य नक्षत्र रहेगा। कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है और यह धन, स्वास्थ्य, और समृद्धि के लिए लाभदायक होता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया कि ज्योतिष में 12 संक्रांतियां होती हैं। जब सूर्य राशि परिवर्तन करता है तो उसे संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य देव धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। 14 जनवरी को सूर्यदेव सुबह 8:55 पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही इस दिन एक महीने से लगा मलमास भी समाप्त हो जाएगा।
शुभ मांगलिक कार्यों पर लगा विराम हट जाएगा। मांगलिक कार्य, मुंडन, सगाई, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस साल की मकर संक्रांति का नाम महोदर होगा। सूर्यदेव पश्चिम दिशा में गमन करेंगे। सूर्यदेव का वाहन बाघ है और उप वाहन अश्व है। सूर्यदेव पीले रंग का वस्त्र धारण करेंगे। उस दिन सूर्यदेव का आयुध गदा होगा और वे चांदी के बर्तन में पायस को भोजन स्वरूप में लेंगे। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की दृष्टि वायव्य कोण यानी उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर रहेगी।
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जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है वे ये करे उपाय

जिनकी कुंडली में सूर्य का बल कम है या अशुभ है वे मकर संक्रांति के दिन सुबह स्नान के बाद एक तांबे के बर्तन में शुद्ध जल भर कर उसमें रोली, चावल, चीनी, लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को ऊं घृणी सूर्याय नम मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें।

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इस दिन पवित्र नदियों के स्नान और दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति वाले दिन पवित्र नदियों के जल एकत्रित करना चाहिए। इस दिन गुड़ ,तिल, कंबल, गर्म वस्त्रों का दान करना चाहिए। क्योंकि तिल का संबंध शनिदेव से है और इसका दान शनिदोष को कम करता है। इस दिन सूर्यदेव शनि की राशि मकर में एक माह के लिए प्रवेश करते हैं, जिससे शनि का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है। काले तिल का दान न केवल शनिदोष से मुक्ति दिलाता है, बल्कि सूर्यदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। मान्यता ये भी है कि इस दिन किए हुए दान का अनंत फल मिलता है।
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सूर्य होंगे उत्तरायण:-

सूर्य छह महीने दक्षिणायन और छह महीने सूर्य उत्तरायण रहते है। मकर संक्रांति वाले दिन सूर्य देव छह महीनों के लिए उत्तरायण हो जाते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन भी कहा जाता है।उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन की अवधि रात है। वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है। मकर संक्रांति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। इसलिए धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का अत्यंत महत्व बताया है।
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इस साल में ये रहेंगे विवाह के मुहूर्त -

जनवरी - 16,17, 21, 22
फरवरी - 3, 4,13, 18, 20, 21, 25

मार्च - 3

अप्रैल - 14, 18, 19, 20, 21, 22, 29, 30

मई - 5, 6, 10,13,17,18

जून - 1, 2,7, 8

नवंबर - 22, 23, 25, 27, 29, 30

दिसंबर - 5
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