नारनौल। रोडवेज वर्कशॉप में स्टाफ की कमी के कारण बसों की मरम्मत और जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यहां विभिन्न तकनीकी विभागों में करीब 200 पद स्वीकृत हैं लेकिन केवल लगभग 20 पदों पर ही नियमित नियुक्ति हो पाई है। बाकी पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
स्टाफ की कमी के चलते वर्कशॉप का काम मुख्य रूप से अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं के भरोसे चल रहा है। बस चालकों की ओर से खराबी की सूचना देने के बाद मरम्मत का कार्य भी अप्रेंटिस ही करते हैं। मरम्मत के बाद बस सही तरीके से ठीक हुई या नहीं, इसकी अंतिम जांच करने वाले महत्वपूर्ण तकनीकी पद भी खाली पड़े हैं।
वर्कशॉप में फिलहाल केवल 25 नियमित कर्मचारी और 54 अप्रेंटिस कार्यरत हैं। विद्युतकार और पेंटर जैसे अहम तकनीकी विभागों में तो एक भी नियमित कर्मचारी नहीं है जबकि अन्य विभागों में भी केवल 5 से 30 प्रतिशत तक ही पद भरे हुए हैं।
दूसरी ओर, डिपो में बस संचालन के लिए भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है। यहां कुल 157 बसें संचालित हैं, जिनमें 137 रोडवेज और 20 किलोमीटर स्कीम की बसें शामिल हैं।
इनके लिए लगभग 77 चालकों और 20 परिचालकों के पद खाली हैं। वर्तमान में 163 चालक और 195 परिचालक कार्यरत हैं फिर भी व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है और संचालन व रखरखाव दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
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साप्ताहिक अवकाश भी लंबित
स्टाफ की कमी के कारण चालक व परिचालक के साप्ताहिक अवकाश में भी कटौती की जाती है। इसके चलते कई चालक व परिचालक ऐसे हैं जिनके दो से तीन माह के साप्ताहिक अवकाश लंबित चल रहे हैं।
अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं को नियमित करने की मांग
अप्रेंटिस के तहत प्रशिक्षुओं को एक साल के लिए काम करने का अवसर मिलता है, इसके लिए प्रशिक्षुओं को निर्धारित मेहनताना भी दिया जाता है लेकिन एक साल बाद पुराने प्रशिक्षुओं के स्थान पर नए प्रशिक्षुओं को रखा जाता है। प्रशिक्षुओं का कहना है कि एक साल कार्य करने के बाद उन्हें बस मरम्मत का अनुभव हो जाता है, ऐसे में हमें कौशल व अन्य श्रेणी के तहत नियमित किया जाना चाहिए।
वर्जन :
सभी लंबे व छोटे रूट पर बसों का संचालन सुचारू बना हुआ है। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए मुख्यालय को अवगत करवाया गया है। उम्मीद है जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्ति की जाएगी।
-देवदत्त, महाप्रबंधक, नारनौल डिपो