हकेंविवि के नए प्रशासनिक भवन का उद्घाटन करते उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चैटाला, कुलपति प्रो.आरसी कु?
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हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंविवि) में आयोजित भारतीय जीवाणुतत्ववेत्त संगठन के 60वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हमें जलवायु परिवर्तन को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखा है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी इसकी शुरूआत कर हरियाणा में अग्रणी पहल करे।
उन्होंने कहा कि मौजूद समय में पर्यावरण गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदूषण के लिए केवल पराली को दोष देना गलत है। हरियाणा के छह शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचा हुआ है। पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण का खतरा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को पाठ्यक्रम में जगह देकर विद्यार्थियों को इस विषय में जागरूक करने की जरूरत है। इस बारे में उन्होंने मानव संसाधन मंत्री को पत्र लिखा है। ताकि इसे स्कूली स्तर के पाठ्यक्रमों में शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस कोशिश से अग्रणी पहल कर सकता है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने अपने अनुभव सांझा करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति पर खुशी जाहिर की।
कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ को उनके इस क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड और फेलो ऑफ माइक्रकोबायोलॉजीकल साइंसेज से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्होंने अपने परिवार के साथ लिया और कहा कि परिवार के सहयोग के कारण ही यह संभव हो सका है। इसलिए यह सम्मान सर्वप्रथम परिवार के सदस्यों को समर्पित है। प्रो. आरसी कुहाड़ ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, डॉ. केसी बांगड़, एएमआई के अध्यक्ष प्रो. जेएस विर्दी सहित एएमआई के सभी पूर्व अध्यक्षों, महासचिव प्रो. योगेंद्र सिंह और आईजेएम के प्रधान संपादक प्रत्युष शुक्ला सहित सभी विदेशी विशेषज्ञों का विश्वविद्यालय आगमन पर स्वागत किया।
वायुमंडल में कार्बन भी जरूरी
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जीजेयू के पूर्व कुलपति केसी बांगड़ ने कहा कि पराली की समस्या का समाधान माइक्रो बायोलॉजी के जरिए हो सकता है। इस क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वायुमंडल में कार्बन होना भी जरूरी है। कार्बन की तय मात्रा नहीं होगी तो तापमान माइनस 50 डिग्री पर पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि शोध संस्थानों में अधिक काम करने की जरूरत है। वर्ल्ड के टॉप 200 रिसर्च सेंटर में इंडिया का कोई सेंटर नहीं होना गंभीर है।
11 देशों के प्रतिनिधि करेंगे चर्चा
सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार ने बताया कि 11 देशों से 13 विदेशी विशेष और देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से करीब 560 विशेषज्ञ व प्रतिभागी अगले चार दिनों तक विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। उनके क्षेत्रों में जारी शोध कार्यों से अवगत कराएंगे। आयोजन सचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।