माधोगढ़ की पहाड़ी पर उड़ते हुए ड्रोन को देखते अधिकारी।
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अरावली की पहाड़ियों पर वन विभाग ने ड्रोन के माध्यम सीड बॉल डलवाया। प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्रकाश यादव ने माधोगढ़ स्थित किले से ड्रोन का बटन दबाकर उद्घाटन किया। अब प्राकृतिक तौर पर यह बीज उगेंगे। इसके बाद यह पौधे जंगली पौधों के साथ बड़े होकर पेड़ का रूप धारण करेंगे।
महेंद्रगढ़ वन मंडल में लगभग 45 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन द्वारा एरियल सीडिंग की जाएगी। इको फ्रेडली तरीके से यहां पौधरोपण होगा। इस मौके पर मंत्री ओमप्रकाश यादव ने कहा कि वन विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना सराहा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित की हर आदमी की जिम्मेवारी है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने की बजाय पौधों को बचाने पर काम किया जाना चाहिए। अगर पौधे नहीं बचेंगे तो इससे प्रकृति खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में प्रयोग के लिए महेंद्रगढ़ क्षेत्र के माधोगढ़ तथा नांगल चौधरी क्षेत्र के गोलवा एंव नायन क्षेत्रों की पहाड़ियों का चयन किया गया है। इस मौके पर मुख्य वन संरक्षण अधिकारी वाश्वी त्यागी, एडीसी मुनीष नागपाल, जिला वन अधिकारी विपिन कुमार, रेंज आफिसर रजनीश आदि वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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11616.53 हेक्टयर पौधरोपण किया जाएगा
जिला वन अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि जिला महेंद्रगढ़ में कुल 17706.7 हेक्टेयर अरावली पहाड़ी क्षेत्र हैं। जिसमें 11616.53 हेक्टेयर अरावली क्षेत्र में अरावली परियोजना के पौधरोपण कार्य करवाया गया है। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा ड्रोन तकनीक काप्रयोग करके एरियल सीडिंग के द्वारा पौधरोपण करने का नया प्रयोग किया जा रहा है। अरावली पहाड़ी क्षेत्र में ऐसे बहुत ही दुर्गम क्षेत्र हैं जहां आसानी से मनुष्य का पहुंच पाना संभव नहीं है। उन्होंने रिमोट द्वारा ड्रोन चला कर माधोगढ़ की दुर्गम पहाड़ियों में बीजों का छिड़काव किया।
सीड बॉल पर छिड़काव के बाद नहीं है देखरेख की आवश्यकता
विपिन कुमार ने कहा कि इस सीड बॉल की खासियत है कि इनका छिड़काव करने के पश्चात इन्हें अन्य किसी प्रकार की देखरेख की आवश्यकता नहीं है। इनमें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिश्रित किए गए हैं तथा सीड बॉल के मौजूद अन्य तत्वों के कारण इन्हें दीमक व चूहों आदि द्वारा नष्ट किए जाने की कोई संभावना नहीं है। बरसात आने पर इन सीड बॉल में मौजूद बीजों में फुटाव आएगा तथा उसमें मौजूद पोषक तत्व इन पौधों की प्रारम्भिक वर्दी में सहायक होंगे।