रेवाड़ी। गांव कान्हड़वास स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में ठंड के मौसम के बावजूद व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। सुबह के समय जब ठंड सबसे अधिक होती है, उस वक्त बच्चों को कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है लेकिन ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।
विद्यालय के कमरों की खिड़कियां टूटी हुई हैं जिनसे ठंडी हवा सीधे कक्षाओं के भीतर प्रवेश करती है। हैरानी की बात यह है कि ठंड से बचाव के लिए इन्हें बंद कराने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते बच्चों को पढ़ाई के दौरान ठिठुरन झेलनी पड़ रही है। वहीं ऐसे हालातों में बच्चों के बीमार होने का खतरा बना रहता है।
कक्षाओं में बच्चों के बैठने के लिए डेस्क की व्यवस्था तो है लेकिन ठंडी हवा के कारण बच्चों का ध्यान पढ़ाई से बार-बार भटक जाता है। कई बार बच्चे ठंड से बचने के लिए एक-दूसरे से सटकर बैठने को मजबूर हो जाते हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इसके लिए बजट का अभाव है। बजट मिले तो सारा कार्य हो सकता है।
वहीं विद्यालय भवन में मानकों के अनुसार पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध हैं। इसी कारण बरामदे में कक्षाएं नहीं लगाई जा रही हैं। स्कूल के शिक्षकों का भी मानना है कि यदि टूटी खिड़कियों को ठीक करवा दिया जाए तो कक्षाओं का वातावरण काफी हद तक बेहतर हो सकता है। इससे बच्चों को ठंड से राहत मिलेगी और वे एकाग्र होकर पढ़ाई कर सकेंगे।
बच्चों के लिए गुनगुना पानी बेहद जरूरी
मिड-डे मील योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में बच्चों को नियमित रूप से भोजन तो उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन ठंड के मौसम में विद्यार्थियों को आवश्यक गुनगुना पानी नहीं मिल पा रहा है। ठंड के दिनों में ठंडा पानी पीने से सर्दी, खांसी और गले से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में गुनगुना पानी बेहद जरूरी माना जाता है। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस विषय में अभी तक निदेशालय की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं, इसलिए पानी गर्म करने की कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है जबकि बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए विभाग को स्वयं पहल करते हुए तुरंत निर्देश जारी करने चाहिए कि मिड-डे मील के साथ स्वच्छ और गुनगुना पानी उपलब्ध कराना बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
विद्यालय में चौकीदार नहीं, चोरी का रहता है डर
विद्यालय में लंबे समय से चौकीदार की नियुक्ति नहीं है जिससे चोरी की आशंका बनी रहती है। रात के समय स्कूल परिसर असुरक्षित रहता है और विद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा विद्यालय में साफ-सफाई के लिए भी कोई स्थायी कर्मचारी नियुक्त नहीं है। कर्मचारियों की कमी के कारण कक्षाओं, शौचालयों और परिसर की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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ठंड के मौसम में बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर विद्यालय प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। खिड़कियां, झरोखे और रोशनदान खुले रहने का कारण उचित उपकरणों की कमी है। अस्थायी तौर पर इन्हें बंद कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को ठंडी हवा से राहत मिल सके। मिड-डे मील के साथ गुनगुना पानी उपलब्ध न कराए जाने के संबंध में अभी तक निदेशालय से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। निर्देश मिलते ही आवश्यक व्यवस्था कर दी जाएगी।
-भूप सिंह, मुख्य अध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय कान्हड़वास।
टूटी हुई खिड़की में रस्सी डालकर किया गया बंद। संवाद