प्रदेश सरकार ने निजी स्कूल बसों पर मोटर व्हीकल टैक्स (एमवीटी) लागू कर संचालकों की टेंशन बढ़ा दी है। अब स्कूलों को 12 में से 9 महीने बसों का टैक्स आरटीए कार्यालय में जमा करवाना होगा। इसके अलावा शैक्षणिक संस्था की बसों पर भी टैक्स 60 रुपये प्रति सीट प्रति माह जमा करवाना होगा। प्रदेश सरकार के इस फैसले से जिले के लगभग 360 स्कूल प्रभावित होंगे। सभी स्कूलों के पास लगभग 1500 छोटी-बड़ी गाड़ियां हैं। इस संबंध में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन कह चुकी है टैक्स बढ़ने पर अभिभावकों पर ही अतिरिक्त भार पड़ेगा। वो अपने पास से कोई टैक्स नहीं देंगे।
राज्य सरकार ने नए सत्र से मोटर व्हीकल टैक्स भी स्कूल वाहनों पर अनिवार्य कर दिया है। यह टैक्स उन्हीं स्कूल संचालकों को जमा करवाना होगा, जो प्रति बच्चा 200 रुपये से अधिक वाहन चार्ज लेते हैं।
नौ माह ही देना पड़ेगा टैक्स
सरकार ने नए सत्र से टैक्स फीस निर्धारित कर दी है। एमवीटी के मामले में सरकार ने निजी स्कूल संचालकों को अप्रैल, मई तथा जून में महीने में राहत प्रदान की है। इन महीनों में संचालकों को टैक्स नहीं देना पड़ेगा। उसके बाद जुलाई से मार्च तक 9 महीने 20 रुपये प्रति सीट टैक्स देना होगा। इसकी फाइल आरटीए कार्यालय में जमा करवानी होगी। टैक्स माफ करवाने वाले स्कूल संचालक 200 रुपये से कम फीस लेने का एफिडेविट भी देंगे। शैक्षणिक संस्था कॉलेज आदि की बसों पर भी टैक्स लागू किया है।
अभिभावकों पर बढ़ेगा भार
निजी स्कूल पहले ही भारी भरकम फीस तथा किताबों आदि के खर्चे वहन कर रहे हैं। स्कूल बसों पर टैक्स बढ़ जाने पर यह भार भी अभिभावकों पर ही पड़ेगा। पहले ही निजी स्कूलों में ट्रैवल फीस से लेकर बिल्डिंग फंड, वार्षिक चार्ज, रजिस्ट्रेशन सहित अनेक फंड बनाकर भारी भरकम फीस वसूल रहे हैं। स्कूलों ने तीन किलोमीटर से सात किलोमीटर तक 500 रुपये तक कनवेंस चार्ज ले रहे हैं। वहीं 07 से 15 किलोमीटर दूरी तक 800 रुपये कनवेंस चार्ज ले रहे हैं जबकि 25 किलोमीटर से ऊपर तक 1000रुपये चार्ज ले रहे हैं।
टीम करेगी जांच
अधिकारियों का कहना है कि ज्यादा फीस लेकर रिकार्ड में 200रुपये से कम फीस दिखाई गई तो उन स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग इनको पकड़ने में हर स्तर पर जांच करेगी। इसके अलावा स्कूल के किसी भी बच्चे या उनके अभिभावक से संपर्क कर असल फीस के बारे में पूछताछ की जाएगी।
अगर निजी स्कूल संचालक 200 रुपये से अधिक ट्रैवल फीस लेंगे, उन्हें प्रति सीट के हिसाब से 20 रुपये प्रति माह जमा करवाना होगा। जबकि शैक्षणिक संस्थाओं को 60 रुपये प्रति सीट प्रति माह जमा करवाना होगा। टैक्स चोरी करने वालों संचालकों को सख्ती से निपटा जाएगा।
रविंद्र सिंह, अस्टिेंट सेक्रेटरी, आरटीए
सरकार को एमवीटी नहीं लगाना चाहिए। टैक्स निजी स्कूल संचालक अपनी जेब से वहन नहीं करेंगे बल्कि अभिभावकों से ही लिया जाएगा। इसलिए टैक्स लागू होने से अभिभावकों की जेब पर ही भारी पड़ेगा। -जगदेव सिंह- प्रधान, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन महेंद्रगढ़