हॉकी वाली सरपंच के नाम से मशहूर नीरू यादव को कौन बनेगा करोड़पति में स्पेशल गेस्ट के तौर पर आमंत्रित किया गया था। नीरू यादव कार्यक्रम राजपूती ड्रेस में अमिताभ बच्चन के सामने बैठी। उन्होंने अमिताभ बच्चन द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देकर 6 लाख 80 हजार रुपए की राशि जीती है।
नारनौल की बेटी और राजस्थान के बुहाना पंचायत समिति की ग्राम पंचायत लांबी अहीर की सरपंच नीरू यादव ने कौन बनेगा करोड़पति शो में 6 लाख 80 हजार रुपये की राशि जीती है। नीरू ने जीती रकम को महिला सशक्तिकरण व बालिकाओं की पढ़ाई व खेल के लिए देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनके कार्यों की बदौलत ही उनको हॉट सीट मिली और अमिताभ बच्चन के सामने बैठी।
विज्ञापन
राजपूती ड्रेस में अमिताभ बच्चन के सामने बैठी सरपंच
सोमवार रात को हॉकी वाली सरपंच के नाम से मशहूर नीरू यादव कौन बनेगा करोड़पति में बिग-बी अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर थी। महाराणा प्रताप नगर निवासी राम सिंह यादव व उनके परिवार की नजरें रात को अपनी बेटी का कौशल देखने के लिए टीवी पर लगी थी। नीरू यादव को केबीसी में स्पेशल गेस्ट के तौर पर आमंत्रित किया गया था। नीरू यादव कार्यक्रम राजपूती ड्रेस में अमिताभ बच्चन के सामने बैठी।
अमिताभ बच्चन ने नीरू यादव के हॉकी व बर्तन बैंक के कार्य की सराहना भी की। उन्होंने अमिताभ बच्चन द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देकर 6 लाख 80 हजार रुपए की राशि जीती है। नीरू ने शो में बार-बार हरियाणा का जिक्र किया। सरपंच नीरू यादव का पीहर हरियाणा के नारनौल है। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश में खेल को ज्यादा महत्व दिया जाता है।
विज्ञापन
यहां बता दे कि नारनौल में पली बढ़ी नीरू यादव 2020 में लांबी अहीर ग्राम पंचायत की सरपंच बनी। सरपंच बनने के बाद उन्होंने अपने गांव की तस्वीर बदलने का काम किया। उन्होंने ग्राम पंचायत में लड़कियों की हॉकी टीम तैयार की। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी सैलरी से बच्चियों के लिए एक कोच भी रखा। नीरू यादव ने अपने कार्यों से गांव की दशा व दिशा बदलने का प्रयास किया।
गांव की हॉकी की टीम भी पहुंची
कार्यक्रम में नीरू यादव के साथ उनके पति अशोक यादव के अलावा उनके द्वारा तैयार करवाई जा रही गांव की हॉकी की टीम की महिला सदस्य भी पहुंची। अमिताभ से बातचीत नीरू यादव ने बताया कि जब वह शादी करके पहुंची तो गांव में महिलाएं सिर पर दूर से पानी लाती थी और अपनी बात नहीं रख पाती थी। इसलिए उन्होंने सरपंच बनने की ठानी।
आसान नहीं था काम करना
नीरू यादव ने कहा कि जब सरपंच के बारे में बात आती है तो लगता है कि कोई पुरुष होगा, लेकिन उन्होंने यह बदला है। हमारे यहां भी फैसले पंचायतों में बडे़ बुजुर्ग करते थे। इसलिए मुश्किल था कि उन फैसलों पर वह बोले। पुरुषों को भी लगता था कि 8-9 साल पहले शादी करके आई महिला आज पंचायत में बोल रही है। नीरू ने कहा कि वह महिलाओं के पति अत्याचार सहन नहीं करती। मैं उनके पक्ष में खड़ी रहती हूं। जब हम घर संभाल सकती है तो पंचायतों को भी संभाल सकती हैं।