बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत जिले में अब तक नाममात्र के ही बच्चों ने ही दाखिला लिया है जबकि निजी स्कूलों द्वारा अपनी कुल सीटों की जानकारी विभाग को उपलब्ध करवा दी है। जिसके तहत जिले में कुल 2418 सीटें दाखिले के रिजर्व की गई है। अभी तक 122 बच्चों ने ही नर्सरी व पहली में दाखिला लिया है। इसका बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि इस अधिनियम में केवल नर्सरी से प्रथम कक्षा तक के बच्चों को दाखिला दिया जा रहा है। इसके अलावा अधिनियम में एक किलोमीटर की परीधि में निजी स्कूल का होने की शर्त भी रखी गई है।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने गत दिनों शिक्षा अधिनियम 134ए को समाप्त करने की घोषणा करते हुए केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को दाखिला देने का निर्णय लिया है। इस नियम में केवल नर्सरी से पहली कक्षा तक के ही बच्चों को दाखिला जाएगा। हालांकि इस अधिनियम में निजी स्कूलों की कुल सीटों में से 25 प्रतिशत सीटें ऐसे बच्चों के लिए आरक्षित रखी गई है। जबकि नियम 134ए के तहत केवल 10 प्रतिशत सीटों पर ही दाखिला मिलता था मगर इन अधिनियम के तहत अभी तक नाममात्र बच्चों ने ही दाखिला लिया है। विभागीय आंकड़ों में जिले में निजी स्कूलों की संख्या 187 है। जिनमें कुल 9670 रिक्त सीटें दर्शायी गई है। जिनकी 25 प्रतिशत सीटें 2418 दिखाई गई है मगर इन सीटों पर केवल 122 विद्यार्थियों ने ही दाखिला लिया है। इनमें 48 विद्यार्थियों ने नर्सरी व 74 ने पहली कक्षा में दाखिला लिया है।
187 स्कूलों में 122 बच्चों ने लिया दाखिला
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा मौलिक शिक्षा निदेशालय को भेजी गई रिपोर्ट अनुसार जिले में कुल 187 निजी स्कूल है। इन स्कूलों में कुल 9670 सीटें दिखाई गई। जिनकी 25 प्रतिशत कुल 2418 बनती है। मगर अब तक इन सीटों पर मात्र 122 बच्चों ने ही दाखिला लिया है। इस प्रकार 2296 सीटें अभी भी रिक्त बची हुई है।
बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत जिले के निजी स्कूलों की कुल सीटों की 25 प्रतिशत 2418 बच्चों के लिए आरक्षित रखी गई है। इन सीटों पर अभी तक 122 बच्चों ने ही दाखिला लिया है। यह रिपोर्ट मौलिक शिक्षा निदेशालय को भेज दी गई है।
-विजेंद्र श्योराण, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नारनौल।