मंडी अटेली। साहित्य जगत में रोहित यादव एक ऐसा नाम है जिन्होंने अपने लेखन के से देशभर में ख्याति अर्जित की है। साथ ही, नवोदित रचनाकारों को आगे बढ़ने के लिए एक मंच प्रदान कर रहे हैं।
विगत चार दशकों से पत्रकारिता, लेखन और साहित्य साधना में लीन रोहित की साहित्यिक कृतियों में करीब पांच दर्जन पुस्तकें शुमार हैं जिनमें उपन्यास, लघुकथा संग्रह, निबंध संग्रह, दोहा संग्रह, कुंडली संग्रह आदि शामिल हैं।
रोहित की रचनाएं देश की प्रथम श्रेणी की सैकड़ों पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं इसके अतिरिक्त विभिन्न आकाशवाणी केंद्रों से प्रसारित हो चुकी हैं।
श्रेष्ठ लेखन के लिए हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकुला ने रोहित यादव को बालमुकुंद सम्मान, सूरदास सम्मान व अकादमी के सर्वोच्च पुरस्कार आजीवन साहित्य साधना सम्मान से भी विभूषित किया है।
रोहित यादव का लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, ओरिएंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और भारत बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया है और उनको हरियाणा सरकार द्वारा आजीवन मुफ्त बस यात्रा पास भी प्रदान किया गया है।
चार दशक पूर्व रोहित ने जो साहित्यिक पौधा लगाया था आज वह एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। जिसकी शाखाएं और टहनियां छतनार बनकर नवोदित रचनाकारों को आश्रय प्रदान कर रही हैं।
रोहित को अपनी सेवाओं का फल आज भी मिल रहा है। उनके साहित्यिक अवदान को मद्देनजर रखते हुए देश की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं ने बीते वर्ष 2025 में उनको दो दर्जन से भी अधिक राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा है।