फोटो संख्या:84- गोशाला रोड पर आपस में लड़ाई के दौरान बेसहारा गोवंशों को भगाते दुकानदार--संवाद
महेंद्रगढ़। शहर की गलियों, बाजारों व मुख्य सड़कों पर करीब एक हजार से अधिक बेसहारा गोवंश से शहरवासी परेशान है। सात सालों में इन बेसहारा गोवंश को सहारा देने के लिए कागजों में करीब चार बार योजनाएं बन चुकी है लेकिन धरातल पर नहीं उतर पाईं।
महेंद्रगढ़ शहर में बेसहारा पशुओं के कारण हादसों की समस्या गंभीर बनी हुई है। सड़कों, गली-मोहल्लों और मुख्य बाजारों, सब्जी मंडी, आजाद चौक, कैंची मोड़, गोशाला रोड, कॉलेज के जनदीक, स्टेट हाईवे 148बी पर आवारा पशुओं का जमावड़ा रहने से राहगीरों और वाहन चालकों की जान जोखिम में रहती है। इससे आए दिन सांडों की चपेट में आने से आए दिन दो-तीन लोग घायल हो रहे हैं।
बॉक्स
बेसहरा पशुओं के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। नगरपालिका ने बजट तैयार का इसका टेंडर करने की बात कही गई थी लेकिन गत वर्ष भी यह अभियान अधर में दम तोड़ गया था और इस बार तो शुरू तक नहीं हो पाया है।
-दिनेश वैद्य, प्रधान ब्रह्मण, सभा, महेंद्रगढ़
बॉक्स
नगरपालिका के दावे धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं। नगर पालिका ने कई बार बेसहारा गोवंशों को छोड़ने के लिए नंदी गोशाला के लिए प्रस्ताव पास किए लेकिन वह भी कागजों में सिमट कर रह गए।
-सुरेश सैनी, प्रधान, सैनी सभा, महेंद्रगढ़
कानून क्या कहता है?
मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर मृतक के परिजन मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे का दावा कर सकते हैं। यदि हादसा आवारा पशु के कारण हुआ है तो अदालत यह जांचती है कि क्या प्रशासन ने पशुओं को नियंत्रित करने में लापरवाही की। अगर नगर पालिका या संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय होती है तो उन्हें मुआवजा देने का आदेश दिया जा सकता है। इसमें मुख्य आधार प्रशासनिक लापरवाही होती है।