वेस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर परियोजना के तहत रेलवे द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन का पूरा मुआवजा नहीं मिलने को लेकर सोमवार को गांव लोधाना के ग्रामीणों ने उपायुक्त को मुख्यमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने पूर्ण भुगतान नहीं होने पर जमीन पर रेलवे को कब्जा नहीं देने की चेतावनी भी दी है। किसानों ने कहा कि वर्ष 2012 में रेलवे विभाग ने जमीन का अधिग्रहण किया था। साढ़े 4 साल बीत जाने के बाद भी पूर्ण भुगतान नहीं किया गया है। जब तक पूर्ण भुगतान नहीं होता है किसान अपनी जमीन पर रेलवे को कब्जा नहीं देंगे। इसके लिए ग्रामीण वर्ष 2012 से जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व सीएम विंडो पर भी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों ने बताया कि रेलवे ने बाजार भाव में जमीन का मुआवजा देने के लिए कहा था, परंतु 2012 में 20 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया गया, जबकि वर्ष 2009 में उनके गांव में 42 लाख रुपये में सेलडीड हो चुकी थी। मुआवजा फिक्सिंग कमेटी ने गांव की भूमि की तीन वर्ष की एवरेज दर 30 लाख रुपये प्रति एकड़ निकाली थी। किसानों ने बाजार दर पर मुआवजा देने के लिए 26 मार्च 2012 को गुड़गांव कमिश्नर को अपील दायर की थी। पहले सुनवाई गुडगांव, फिर रोहतक, इसके बाद हिसार और अब फिर से गुड़गांव में होने के आदेश दिए हैं। रेलवे ने अधिग्रहण से प्रभावित परिवार के एक-एक सदस्य को रेलवे में नौकरी का वादा किया था। फार्म भी भरवाए गए, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं हो पाया। इस अवसर पर जगमाल सिंह, रूपचंद, पूर्व सरपंच नरेंद्र सिंह, पूर्व सरपंच रामौतार, सतीश राव, धर्मपाल नंबरदार, धर्म सिंह नंबरदार आदि लोग मौजूद थे।