नारनौल। महेंद्रगढ़ रोड पर नसीबपुर में स्थित वृद्धाश्रम बेसहारा, लाचार और बीमार बुजुर्गों का सहारा बना है।
यहां पर लोगों को रखा जाता है, जिन्हें घर से बेघर कर दिया गया हो या परिजन लड़ाई-झगड़ा कर उन्हें परेशान करते हों। आश्रम में बुजुर्गों के लिए रहने खाने, मेडिकल और मनोरंजन की पूरी व्यवस्था है। सारी सुविधाएं निशुल्क हैं। आश्रम में तीन लोगों का स्टाफ है। आश्रम में फिलहाल एक महिला समेत दो बुजुर्ग रह रहे हैं।
75 वर्षीया शांति देवी यहां पर करीब 3 साल से रह रही हैं, जबकि 80 साल के श्यामसुंदर करीब 10 दिन पहले यहां आए हैं। शांति देवी गांव खातोली अहीर की रहने वाली हैं। भरापूरा परिवार है, लेकिन बहू-बेटों के व्यवहार से तंग आकर वह इस आश्रम में रह रही हैं। अब आश्रम को ही अपना घर मानती हैं। शांति देवी को कम सुनाई देता है। इसके लिए स्टाफ रेडक्रॉस से संपर्क कर उनके लिए जल्द ही कान की मशीन उपलब्ध कराएगा। वहीं श्यामसुंदर नांगल चौधरी शहर के रहने वाले हैं। घुटने के दर्द से पीड़ित हैं। घरवालों की उपेक्षा से दुखी होकर वह यहां पर रह रहे हैं।
सोशल वर्कर पूजा सैनी ने बताया कि संस्था की शुरूआत साल 2000 में नांगल चौधरी में की गई थी। साल 2020 में आश्रम की शुरूआत की गई। करीब 2 माह पहले ही आश्रम को नारनौल में शिफ्ट किया गया है। इनके अलावा यहां पर मोहित गोठवाल व सहायक रघुवीर सिंह की ड्यूटी है। रघुवीर 24 घंटे आश्रम में ही रहते हैं और बुजुर्गों की भोजन आदि की व्यवस्था देखते हैं। पूजा सैनी ने बताया कि वह समय-समय पर गांवों का दौरा करती हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी वर्करों और सरपंचों के साथ बैठक भी की जाती है। साथ ही पंफलेट बांटने के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन कराया जाता है।
इंसेट
20 बेड हैं आश्रम में
आश्रम में बेसहारा लोगों के लिए तीन कमरे और 20 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा एक डाइनिंग हॉल भी बनाया गया है। जहां बड़ी से मेज व कुर्सियां रखी गई हैं। वहीं इस हॉल में बुजुर्गों के लिए एक एलईडी टीवी भी लगाई गई है।
बॉक्स
ये है डाइट चार्ट
सुबह और शाम की चाय के अलावा सोमवार को हल्का नाश्ता, लस्सी या जूस, दोपहर को सब्जी, रोटी और दही या रायता, रात को दाल, रोटी, मंगलवार को तरी वाली सब्जी, रोटी व चावल, रात को खिचड़ी या दलिया व दूध, बुधवार को दिन में सब्जी रोटी व मीठा, रात को दाल-रोटी, वीरवार को कढ़ी चावल व रोटी, रात को सब्जी रोटी, शुक्रवार को दिन में सब्जी रोटी व रायता, रात को खिचड़ी या दलिया व दूध, शनिवार को दिन में तरी वाली सब्ती, रोटी व चावल, रात को दाल रोटी व रविवार को दिन में दाल या राजमा, रोटी व चावल और रात को सब्जी रोटी दी जाती है।
वर्जन
25 साल से महिला शिक्षा और सशक्तीकरण, बृद्ध जन कल्याण, युवा कल्याण व बाल अधिकार संरक्षण सहित कई सामाजिक कार्य किए जा रहे हैं। 2025 में वृद्धों के लिए आश्रम शुरू किया था, लेकिन नांगल चौधरी में जगह छाेटी होने के चलते अब नारनौल में शुरू किया है। आमजन से अपील है कि किसी भी बेसहारा वृद्ध को देखें को उनसे संपर्क कर सकते हैं।-गणेश, प्रधान, सेवा संस्था।