श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला भाई-बहन के पवित्र स्नेह के प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार आज मनाया जाएगा। इस दिन बहन अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती है और उनकी दीर्घायु, प्रसन्नता के लिए प्रार्थना करती हैं।
ज्योर्तिविद पंडित कृष्ण कुमार शर्मा नावां ने बताया कि शास्त्रानुसार अन्य सभी कार्यों की तरह रक्षाबंधन में भी भद्रा टाली जानी आवश्यक है। इस बार रक्षाबंधन भद्रा से मुक्त है। उन्होंने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर पूरा दिन यानि सूर्योदय से सांय 5.59 बजे तक राखी के लिए शुभ है। उन्होंने ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार श्रवण, धनिष्ठा नक्षत्रों के संयोग में राखी बांधना, बंधवाना मंगलकारी माना गया है। उन्होंने बताया कि श्रवण नक्षत्र प्रात: 8.01 मिनट तक रहेगा। इसके उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। इसके अलावा विशेष अभिजित मुुहूर्त दोपहर 12.05 से दोपहर 1 बजे तक रहेगा जो रक्षाबंधन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने बताया कि इस बार रक्षाबंधन वीरवार के दिन श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वीरवार के दिन श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग का संयोग कम ही बनता है। इस बार रक्षा बंधन के ठीक चार दिन पहले देव गुरु बृहस्पति मार्गी हो रहे हैं। मार्गी गुरु की साक्षी में इस प्रकार का पर्व काल शुभ माना गया है। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा ग्रहण से भी मुक्त रहेगी जिससे रक्षापर्व का संयोग शुभ, सौभाग्यशाली रहेगा और भद्रामुक्त होने से पूरा दिन राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ रहेगा।