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बारिश में सबसे कमजोर कड़ी न बन जाएं बांध

Mon, 13 Jun 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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बांधों की मरम्मत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पंचायत विभाग की ओर से करीब 7 साल पहले कृष्णावती नदी पर बांध बनाए गए थे जिससे जलभराव से भूजल रिचार्ज हो सके लेकिन 6 साल पहले आई बाढ़ में अधिकांश बांध बह गए थे। इनकी पर्याप्त मरम्मत नहीं होने के कारण इनकी हालत खराब है। ऐसे में बारिश होने पर सरकार की भू-जल रिचार्ज योजना पानी में बह जाएगी वहीं नदी के किनारे हजारों एकड़ फसल और दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि नांगल चौधरी क्षेत्र से गुजरने वाली कृष्णावती नदी पर विभाग की ओर से 2009 में भेडंटी, दोस्तपुर, शहबाजपुर, नोलायजा, सैदअलिपुर, ढाणी ठाकरान व नांगल कालिया की सीमा में बांध बनवाए गए थे। लेकिन बिना तकनीक के बने बांध 2010 में क्षमता से अधिक जलभराव होने के कारण बांध टूट गए थे। इसके बाद आवश्यक मरम्मत नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बाढ़ की संभावना उत्पन्न हो गई।

निकासी मार्ग नहीं होने से टूटे बांध
विभागीय सूत्रों के मुताबिक बांध की दीवार नीचे 50 फीट और ऊपर से 15 फीट चौड़ी होनी चाहिए। पानी की निकासी मार्ग पत्थरों से निर्मित होना चाहिए ताकि ओवर लोड पानी से बांध क्षतिग्रस्त नहीं हो सके। बांध के अगले हिस्से की पूर्णतया पत्थरों से चिनाई होनी चाहिए तथा पीछे की ओर कंकरीट बिछानी अनिवार्य है, लेकिन कृष्णावती नदी पर निर्मित बांध निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं हैं। अधिकांश बांधों की दीवार केवल मिट्टी से बनी हैं। निकासी मार्ग नहीं होने के कारण इनकी दीवारें टूट जाती हैं।
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अभी बांधों में नहीं है पानी
2010 में सबसे पहले भेडंटी बांध टूटा था। इसके बाद दोस्तपुर, शहबाजपुर, नोलायजा, ढाणी ठाक्रान व नांगल कालिया बांध टूटे हैं। विभाग ने टूटे हुए भेडंटी, शहबाजपुर, नांगल कालिया बांध की मरम्मत 2012 में करवाई थी। दोस्तपुर, ढाणी ठाकरान बांध अभी भी क्षतिग्रस्त हैं। पिछले 4-5 साल से नदी में पानी नहीं आने के कारण किसी भी बांध में पानी नहीं है।

करोड़ों का बजट फिर बहेगा पानी में  
पिछले दिनों विभाग की ओर से नांगल कालिया, शहबाजपुर, दोस्तपुर, भेडंटी, ढाणी ठाकरान में मनरेगा योजना के तहत क्षतिग्रस्त हुए बांधों की मरम्मत करवाई गई है। किंतु मिट्टी के बलबूते नदी के पानी को रोकना संभव नहीं है। देशराज, हंसराज, बलबीर सिंह, राजेंद्र प्रसाद व सत्यबीर आदि ग्रामीणों ने बताया कि कृष्णावती नदी का निकास राजस्थान में पाटन की पहाड़ियों से होता है। इसके पानी को रोकने के लिए भेडंटी की सीमा में पहला बांध बनाया गया है। जिस पर ओवरफ्लो हुए पानी को निकालने के लिए आंकड़ी की व्यवस्था नहीं है। पहला बांध टूटने पर सभी बांध ओवरफ्लो होकर टूट जाएंगे। इससे हजारों एकड़ फसल व मकान बाढ़ की चपेट में आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि विभाग ने करोड़ों के बजट से बांधों की मरम्मत करवाई थी। किंतु मापदंडों के अनुसार निर्माण नहीं होने के कारण यह बजट राशि पानी में बहने की संभावना है।

बरसात देखकर डरने लगता है बूढ़वाल
राजस्थान की पहाड़ियों का पानी सबसे पहले बूढ़वाल, अमरपुरा, ढाणी सैनियां में प्रवेश करेगा। ये गांव ढलान में बसे हुए हैं। राजमार्ग की ऊंचाई होने के कारण पानी का निकास नहीं हो पाता है। दो साल पूर्व इन गांवों में 4-5 फीट पानी भर गया था। तत्कालीन जिला उपायुक्त डा. साकेत कुमार के निर्देशानुसार राजमार्ग को तोड़कर पीड़ित गांवों को बाढ़ मुक्त किया गया था। उस दौरान उन्होंने गांव के बाहर बांध बनवाने का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक बांध निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। अब फिर बरसात नजदीक देखकर ग्रामीण डरने लगे हैं।
अवैध खनन से बढ़ी समस्या

कृष्णावती नदी में अवैध खनन होने से दोस्तपुर, शहबाजपुर, ढाणी त्रियाला, नोलायजा, टीकवाला में बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। बजरी खनन इन गांवों के नजदीक पहुंच चुका है। वाशिंग प्लांटों के संचालकों द्वारा नदी के मुख्य मार्ग में मलबा डाल दिया गया। इस रुकावट के चलते बरसाती पानी बहने का रास्ता बदल सकता है। जिससे नदी के आसपास उपजाऊ जमीन व गांव बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं।

दशकों से है समस्या, समाधान नहीं
अमरपुरा, थनवास, बूढवाल व ढाणी सैनिया आदि गांवों के ग्रामीणों ने पानी भरने की समस्या कई दशकों से है। राजस्थान के बनेठी, चिमनपुरा और श्यामपुरा की पहाड़ियों में बरसात होते ही गांव में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। पिछले साल बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को पूरी रात घरों की छतों पर बितानी पड़ी थी। मकानों में रखे कपड़े, अनाज व जरूरी सामान पानी में डूबने पर उन्हें आर्थिक एवं मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन को सैकड़ों बार अवगत कराया जा चुका है। किंतु समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है।
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