जिले में मौसम ने अचानक करवट ले ठंड की वापसी करा दी है। एक तरफा जहां बारिश से फसलों में सिंचाई की जरूरत पूरी हो गई है। वहीं दूसरी तरफ ओलावृष्टि की संभावना और तेज हवा के कारण खेतों में खड़ी फसलों में नुकसान की आशंका भी गहराने लगी है। इस बारिश और तेज हवा के कारण जिले में कई जगह फसल झुक गई हैं।
मंगलवार देर रात शुरू हुई रिमझिम बारिश और 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं ने पूरे क्षेत्र में सर्दी का एहसास बढ़ा दिया। लगातार हो रही बारिश से जहां बीते दिनों बढ़ रहे तापमान पर लगाम लगी और अधिकतम तापमान में 8.2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
बूंदाबांदी के चलते बाजार में चहल-पहल कम रही और दुकानें भी अधिकतर बंद रही। वहीं, शहर की सड़कों पर जलभराव होने से राहगीरों को आवागमन में दिक्कत रही। सड़कों पर बारिश को पानी एकत्र हो गया और वाहनों की रफ्तार भी धीमी रही। बुधवार को नारनौल में न्यूनतम तापमान 14.5 व अधिकतम तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गेहूं की फसल को संजीवनी
बारिश ने सरसों व गेहूं की सिंचाई पूरी कर दी है। खासतौर पर गेहूं की फसल को संजीवनी दी है। फिलहाल हो रही गर्मी से गेहूं की फसल की बढ़वार रुक गई थी और इसके चलते दाना भी छोटा रहने की संभावना थी। अब बारिश से मौसम में ठंडक पैदा होने से गेहूं की रुकी हुई बढ़वार शुरू होगी और दाना भी मोटा व स्वस्थ बनेगा। जिले में 36 हजार एकड़ में गेहूं की फसल लगी है। इस बारिश से किसानों को सिंचाई में उपयोग होने वाले खर्च अनुमानित प्रति एकड़ 1000 रुपये खर्च होने थे जो बच गए।
ओलावृष्टि की संभावना से बढ़ी चिंता
कृषि विभाग के अनुसार, क्षेत्र में हुई बारिश फसलों के लिए फायदेमंद साबित होगी। हालांकि ओलावृष्टि की संभावनाओं व तेज रफ्तार हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। क्योंकि क्षेत्र में अधिकतर किसानों ने सरसों की फसल उगाई हुई है। वहीं सरसों की फसल इस समय पकाव के दौर में है और तेज रफ्तार हवाओं व ओलावृष्टि के कारण फसल खराब होने की संभावना बनी रहती है।
जिले में फसलों का अनुमानित रकबा
फसल रकबा एकड़ में
सरसों 2.61 लाख
गेंहू 36 हजार
चना 1100
जौ 252 एकड़
बॉक्स
मैंने सरसों की फसल उगा रखी है। करीब 10 दिन बाद सरसों की कटाई शुरू हो जाएगी। ऐसे समय में अगर अब तेज हवा, अधिक बारिश व ओलावृष्टि हुई तो काफी नुकसान होगा।
-किसान पुरुषोतम, मोहल्ला पीरआगा
बॉक्स
बाजरे की कटाई से सप्ताह भर पहले हुई ओलावृष्टि ने बाजरे की गुणवत्ता को प्रभावित किया था। इस कारण बाजरे का उचित भाव नहीं मिला था। आज हुई बारिश से सरसों की फसल खराब होने की चिंता सताती रही।
-दलीप सिंह, किसान, गांव मुकंदपुरा
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आगामी दिनों में भी बारिश के आसार
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि वर्तमान मौसम प्रणाली के असर से आगामी एक से दो दिन तक क्षेत्र में आंशिक बादलवाही देखने को मिलेगी। साथ ही बूंदाबांदी की संभावना भी बनी हुई है। इससे रात्रि तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी और अगर हवाएं शांत रहीं तो आंशिक कोहरा भी देखने को मिल सकता है।
गर्म कपड़े पहनें की सलाह
नारनौल के नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि बारिश के बाद बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और जोड़ों के दर्द का खतरा बढ़ जाता है। स्वस्थ रहने के लिए गर्म कपड़े पहनें, गुनगुना पानी पिएं, ताजा गर्म खाना खाएं और स्वच्छता का ध्यान रखें। भीगने पर तुरंत कपड़े बदलें और गर्म पेय जैसे सोंठ-शहद का सेवन करें।
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कहां हुई कितनी बारिश
स्थान बारिश (मिमी)
नारनौल 6 मिमी
महेंद्रगढ़ 2 मिमी
कनीना 3.5 मिमी
अटेली 5.5 मिमी
नांगल चौधरी 3 मिमी
सतनाली 3.5 मिमी
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गेंहू में पौटेशियम नाइट्रेट के छिड़काव की सलाह
उपनिदेशक, कृषि विभाग नारनौल के उपनिदेशक देवेंद्र सिंह ने बताया कि फरवरी के दूसरे सप्ताह से तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही थी। इससे फसल की पैदावार प्रभावित होने की संभावना बनी हुई थी। बुधवार को हुई बारिश से तापमान में कमी आएगी जो फसल के लिए फायदेमंद साबित होगी। क्षेत्र में सरसों की फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद है। वहीं यदि आगामी दिनों में तापमान में एकाएक बढ़ोतरी होती है तो किसान गेंहू की फसल में पौटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव कर सकते हैं।
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वर्जन:
इस समय होने वाली बारिश सरसों व गेहूं की फसल में लाभदायक है। हल्की बारिश से दोनों फसलों को लाभ मिलेगा और इससे दाना भी स्वस्थ व पूरा आकार लेगा। साथ ही किसानों को भी सिंचाई के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। - डॉ. अजय यादव, उपमंडल कृषि अधिकारी, कृषि विभाग, महेंद्रगढ़
फोटो संख्या:56- सतनाली के गांव नांवां के खेत में उगी सरसों की फसल--संवाद
फोटो संख्या:56- सतनाली के गांव नांवां के खेत में उगी सरसों की फसल--संवाद
फोटो संख्या:56- सतनाली के गांव नांवां के खेत में उगी सरसों की फसल--संवाद
फोटो संख्या:56- सतनाली के गांव नांवां के खेत में उगी सरसों की फसल--संवाद