डिकॉय पेशेंट के साथ पुलिस-प्रशासनिक टीम ने बृहस्पतिवार को चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा पार्क के सामने स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा मारा। टीम ने मौके से दो लोगों को काबू कर उनसे एसडीएम के हस्ताक्षर किए गए 500-500 रुपये के 28 नोट बरामद किए हैं। अल्ट्रासाउंड करने वाला चिकित्सक मौके पर नहीं मिला।
गुप्त सूचना के आधार पर एसडीएम विवेक कालिया और डीएसपी तान्या सिंह ने बृहस्पतिवार को शाम 4:00 बजे टीम के साथ चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा पार्क के सामने जय अल्ट्रासाउंड सेंटर पर रेड की। टीम ने एक डिकॉय पेशेंट बनाकर अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भेजा था। जब पूरी सेटिंग हो गई और डिकॉय पेशेंट अल्ट्रसाउंड केंद्र में पहुंच गई तब टीम ने रेड की और दो लोगों को काबू किया।
जब सेंटर पर टीम ने रेड की तब तक डिकाय पेशेंट का अल्ट्रासाउंड किया जा चुका था। वहीं अल्ट्रासाउंड करने वाला चिकित्सक मौके पर नहीं मिला। छापे के बाद सीएमओ राजेंद्र, सामान्य अस्पताल के डा. प्रदीप यादव, एसएचओ मलखान सिंह, सिटी चौकी इंचार्ज सतबीर सिंह भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने अल्ट्रासाउंड केंद्र को चारों तरफ से घेर लिया। टीम को शक था कि अल्ट्रासाउंड केंद्र का संचालक अंदर ही है।
टीम ने तोड़े तीन दरवाजे
बिल्डिंग मालिक डा. प्रदीप शर्मा ने मकान के दरवाजे भीतर से बंद कर लिए। टीम मकान के तीन दरवाजे तोड़ते हुए उन तक पहुंची। डा. प्रदीप ने एक कमरे में खुद को बंद कर कुंडी लगा ली और पुलिस पर प्रेशर बनाया कि अगर पुलिस ने इस दरवाजे को तोड़ने की कोशिश की तो वो कुछ गलत कर बैठेगा। इसके बाद टीम वापस लौट गई। डीएसपी तान्या सिंह और एसडीएम विवेक कालिया थाने में पहुंचे।
पहले भी हो चुकी है रेड
जय अल्ट्रासाउंड केंद्र पर पहले दीप अल्ट्रासाउंड केंद्र के नाम से सेंटर चलता था। इस सेंटर को विभाग की टीम ने सील कर दिया था। इसमें डा. प्रदीप को भी आरोपी बनाया गया था। डा. प्रदीप को जब पुलिस की टीम पकड़ कर थाने में लाई थी तो वे पुलिस को चकमा देकर थाने से भाग गए थे। ड्यूटी में कोताही बरतने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया था।
राजनीतिक कारण है छापा: यादव
डा. प्रदीप के अधिवक्ता नरेंद्र यादव ने मामले के बारे में कहा कि बार-बार बिना किसी सुबूत केे छापामारी की जा रही है। ऐसा राजनीतिक कारणों से हो रहा है। उन्होंने कहा कि डा. प्रदीप का मामलेे से कोई लेना-देना नहीं है, डा. प्रदीप ने तो अपनी बिल्डिंग किराए पर दी हुई है। डा. प्रदीप को तो बेवजह परेशान किया जा रहा है।