महेंद्रगढ़। शहर में आए दिन लोगों पर हो रहे बंदरों के हमलों से परेशान नागरिकों का गुस्सा शनिवार को सड़क पर फूट पड़ा। मोहल्ला बिढाठ निवासी सुशील पर बंदर ने हमला कर दिया। इसमें उनके पैर में गंभीर चोट आई और छह टांके लगाने पड़े। घटना से नाराज लोगों ने बालाजी चौक पर करीब एक घंटे तक जाम लगाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
इससे पहले वीरवार को मोहल्ला लालाकुआं की धन्नो देवी भी बंदरों के झुंड के हमले में घायल हो चुकी हैं। नागरिक अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार पिछले 23 दिनों में 15 लोग बंदरों के काटने के बाद रेबिज के इंजेक्शन लगवा चुके हैं।
प्रदर्शन कर रहे सुरेंद्र, आशीष और अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका केवल कागजों में बंदर पकड़ने की कार्रवाई दिखाती है लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न विधायक, न प्रधान और न ही प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है।
नगर पालिका एमई राजेश कुमार से बात की तो उन्होंने अवकाश होने का नाम लिया और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया। इसके बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार अजय कुमार ने लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन नागरिक एसडीएम योगेश सैनी के आश्वासन के बाद ही जाम खोला गया। एसडीएम ने रविवार सुबह बैठक कर समस्या का समाधान निकालने का भरोसा दिया।
बंदर पकड़ने का अभियान बीच में बंद
नगर पालिका ने फरवरी में छह लाख रुपये का टेंडर जारी कर 350 बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू किया था लेकिन प्रदेश सरकार के नए आदेश के बाद यह अभियान बीच में ही रोक दिया गया। अब बंदरों और बेसहारा पशुओं को पकड़ने की जिम्मेदारी गौसेवा आयोग को सौंपी गई है।
-
बंदरों के हमलों में पीड़ित ने बताई आपबीती
केस-1
घायल सुशील ने बताया कि शनिवार सुबह बंदरों का झुंड अचानक उसके घर में घुस में गया और हमला कर दिया। बचाव के लिए वे बाथरूम में घुसा लेकिन पैर बाहर रहने के कारण बंदरों ने पैर पर काट लिया। इसमें पैर की हड्डी भी दिखने लगी और छह टांके आए।
केस-2
वीरवार को बंदरों के हमले से घायल मोहल्ला लालावाला कुआं निवासी धन्नो देवी ने बताया कि वह घर के आंगन में बच्चों के साथ बैठी थी। इसी दौरान 15-20 बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। बच्चे दौड़कर कमरों में छिप गए लेकिन बंदरों ने उसे नीचे गिराकर हाथ पर काट लिया।
केस-3
मोहल्ला पंजाबी निवासी विकास विकास कुमार ने बताया कि पिछले शुक्रवार को छत की टंकी में पानी देखने के लिए चढ़ा था। इसी दौरान 20 से अधिक बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। हमले के बाद मजबूरी में छत से कूदना पड़ा जिसके बाद उसका बांया पैर टूट गया।
परेशानी, लोगों की जुबानी
बॉक्स
शहर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है लेकिन लंबे समय से नपा ने इसपर ध्यान ही नहीं दिया। अब अभियान बंद हो गया।
-दिनेश चंद्र वैध, ब्रह्माण सभा, प्रधान
बॉक्स
एक दशक में बंदरों की संख्या पांच गुणा बढ़ी है। इनके हमलों में हर माह औसतन 50 लोग घायल हो रहे हैं। जल्द ही इसका समाधान नहीं किया तो गलियों में निकलना मुश्किल हो जाएगा।
-सतेंद्र वशिष्ठ, सामाजिक कार्यकर्ता
बॉक्स
बंदरों के झुंड अधिक हिंसक होते जा रहे हैं। लोगों घरों की छतों व बाहर गलियों में जाना छोड़ दिया है। गलियों में खेलते बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। यह गंभीर समस्या है जल्द ही समाधान करना चाहिए।
-राजेंद्र, सामाजिक कार्यकर्ता
बॉक्स
एक माह के दौरान ही 20 से अधिक लोगों पर हमले हो चुके हैं। घरों पर रखा सामान तोड़ना, बाजार में लोगों पर हमला, मोहल्लों में इनके हमले लगातार बढ़ रहे हैं।
-सुरेश सैनी, सैनी सभा, प्रधान
- वर्जन:
फरवरी में करीब छह लाख रुपये का टेंडर छोड़कर अभियान शुरू करा दिया था लेकिन इसी बीच प्रदेश सरकार का निर्णय आ गया कि बेसहारा पशुओं और बंदरों की समस्या के समाधान के लिए गोसेवा आयोग को जिम्मेदारी दी गई है
। - नगर पालिका, प्रधान, रमेश सैनी
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क
फोटो संख्या:71 नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में बंदर के काटने पर घायल सुशील का इलाज करते डॉक्टर क