फोटो 05 आंखों की जांच करवाता बुजुर्ग। संवाद
नारनौल। जिले में सरसों की फसल पक चुकी है और होली के बाद कटाई शुरू हो जाएगी। कटाई के दौरान सरसों पर चिपका रहने वाला सूक्ष्म कीट चेपा फसल के सूखने पर उड़ने लगेगा। कंबाइन हार्वेस्टर या हाथ से कटाई करते समय यह कीट आंखों में घुसकर जलन और लालपन पैदा कर सकता है। इस चलते डॉक्टरों ने आमजन को आंखों का विशेष ध्यान देने की अपील की है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक देवेंद्र सिंह ने बताया कि चेपा बहुत छोटे होते हैं और अक्सर पत्तियों के नीचे या नए अंकुरों पर पाए जाते हैं। इन कीटों के रस चूसने से पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं और मुड़ जाती हैं। यह कीट पौधे पर एक चिपचिपा पदार्थ (मधुरस) छोड़ता है जिस पर काली फफूंद उग आती है जो प्रकाश संश्लेषण को रोकता है। ठंड के मौसम और बादल छाए रहने पर इनका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि नीम के तेल या नीम के पत्तों के घोल का छिड़काव करें। यदि कीड़ों की संख्या अधिक हो, तो इमिडाक्लोप्रिड या डाइमेथोएट का छिड़काव भी कर सकते हैं।
आंखों को बगैर मसले पानी से धोने की सलाह
नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि फसल की कटाई के दौरान किसान अपनी आंखों पर चश्मा लगाकर रखें। इसके बाद भी चेपा आंखों में घुस जाए तो आंखों को बगैर मसले साफ पानी से धोएं। उन्होंने बताया यह कीट अक्सर आंखों में जाते ही अपना लार्वा छोड़ देता है जिससे आंखों में जलन तो होती ही है साथ ही आंखें सुर्ख लाल हो जाती हैं। चिकित्सक ने आमजन से अपील करते हुए कहा है कि सड़क पर बाइक आदि चलाते समय हेल्मेट का या चश्मा अवश्य लगाएं।
वर्जन:
चेपा के कारण आंखों में जलन हो रही है और समस्या अधिक हो रही है तो अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर चिकित्सक से परामर्श लेकर ही आंखों में दवा डाले। मेडिकल स्टोर से ऐसे ही दवा न खरीदें। ये मामूली सा कीट आंखों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।-डॉ. नवीन यादव, नेत्र रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, नारनौल