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निजी स्कूली बसों में ऑटो डिपर लगवाना मनमानी

Thu, 12 Jan 2017 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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दुर्घटना में क्षतिग्रस्त स्कूल बस। - फोटो : अमर उजाला
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परिवहन विभाग हरियाणा द्वारा चौपहिया वाहनों में ऑटो डिपर लगाने के लिए हाल ही में जारी निर्देश का विरोध निजी स्कूल के संचालक ने किया है। विदित हो कि परिवहन विभाग ने ऑटो डिपर लगवाने के लिए स्कूल बसों को भी शामिल किया है। इसलिए प्रदेश के हजारों निजी स्कूल संचालकों ने यह कहते हुए विरोध जताया है कि स्कूल बसें केवल दिन के समय ही चलती हैं ऑटो डिपर का प्रयोग रात के वक्त होता है। स्कूल संचालकों ने प्रोग्रेसिएव प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले निर्देश के खिलाफ परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार मिलने का निर्णय लिया है। साथ ही परिवहन आयुक्त को वीरवार को एक पत्र लिखकर स्कूल बसों को आटो डिपर शर्त से मुक्त करने की मांग की है।
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प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के राज्य प्रधान अनिल कौशिक ने कहा कि निजी स्कूलों की बसें रात्रि के समय नहीं चलती है ऐसे में इनमें ऑटो डिपर लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि आरटीए द्वारा यह कहकर संचालकों पर दबाव दिया जा रहा है कि अगर स्कूल की नई एवं पुरानी बसों में ऑटो डिपर होंगे तो ही उनकी बसों का पास किया जाएगा। स्कूली बसें पहले ही विभाग के सभी नियमों की पालना कर रही हैं, फिर भी आरटीए उन्हें ऑटो डिपर के लिए क्यों बेवजह परेशान कर रहा है। अगरआरटीए विभाग स्कूल बसों को ऑटो डिपर की शर्त से मुक्त नहीं करेगा तो वे परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार से मिलेंगे।
निजी स्कूलों में 800 बसें
प्रदेशभर के निजी स्कूलों में 10500 बसें हैं जो बच्चों को उनके घर तक लाती ले जाती हैं। अकेले महेंद्रगढ़ जिले में 800 बसें हैं। एक बस पर 4500 रुपये का ऑटो डिपर लगता है। जबकि जिले में ऐसे संस्थान हैं जिनके पास 100 से 150 बसें हैं उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।
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पांच कंपनियों को दी थी जिम्मेदारी
सरकार ने हादसों पर अंकुश लगाने के लिए चौपहिया वाहनों में ऑटो डिपर लगाने के निर्देश दिसंबर में जारी किए थे। परिवहन विभाग ने ऑटो डिपर लगाने का जिम्मा पांच कंपनियों को सौंपा था। इस दौरान  स्कूल बस, रोडवेज बस, ट्रक, कैंटर, टैंकर, जीप, मिनी बस, ट्रैक्टर समेत सभी कमर्शियल वाहनों पर डिपर लगाए जाने थे।  
 
ऐसे काम करेगा ऑटो डिपर
एक्सपर्ट द्वारा तैयार किया गया यह डिपर सेंसर के इशारे पर काम करेगा। शीशे पर लगे सेंसर पर जब सामने से वाहन की लाइट पड़ेगी तो बैटरी से करंट मिलने के बाद यंत्र लो बीम पर लाइट को फिक्स करेेगा। इसके बाद दोनों वाहन चालकों को स्पष्ट दिखाई देगा।

जब तक स्कूल बसों को इस शर्त से मुक्त नहीं कर सकते हैं जब तक परिवहन आयुक्त इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं करेंगे। ऑटो डिपर रात्रि के समय ही नहीं बल्कि धुंध में भी काम करता है। -उमेद सिंह मोहन, सचिव रोड ट्रांसपोर्ट-नारनौल

आरटीए विभाग जबरदस्ती स्कूली बसों पर आटो डिपर लगाना चाहती है। जबकि आटो डिपर रात्रि के समय प्रयोग होता है और स्कूल की बसें दिन के समय चलती हैं। इसके लिए हमने परिवहन विभाग के आयुक्त को पत्र वीरवार को पत्र लिखा है। साथ ही परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार से भी इस संबंध में मिलेंगे। अगर यह शर्त स्कूल बसों से नहीं हटाई गई तो हम कोर्ट का सहारा लेंगे।-अनिल कौशिक, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन-प्रधान
 
स्कूल बस संचालक तो पहले ही आरटीए विभाग के नियमों की पालना कर रहा है। निजी स्कूल बसें दिन के समय चलती हैं इसलिये ऑटो डिपर लगाने का कोई औचित्य ही नहीं है। -जगदेव यादव, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला प्रधान

विभाग नये-नये नियम बनाकर निजी स्कूलों पर थोपना चाहती है जो कि सरासर गलत है। स्कूल संचालक पहले बनाए गए नियमों की पूर्ण रूप से पालना कर रही है और अब बसों में ऑटो डिपर लगवाना जिसका कोई लॉजिक ही नहीं है। --रोशनलाल यादव
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