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Mahendragarh-Narnaul News: पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुति से लुप्त हो रही लोक कला की जीवित

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फोटो संख्या:67- निजी स्कूल में आयोजित लोककला विरासत उत्सव कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार-- - फोटो : credit
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महेंद्रगढ़। कहीं पीहू नृत्य, कहीं झूमर, कहीं डांडिया तो कहीं लूर नृत्य की धमक ने पारंपरिक नृत्यों की बेहतरीन प्रस्तुति से लुप्त हो रही लोक कला को जीवित रखने का प्रयास किया। वहीं स्कूल की छात्राओं ने राजस्थानी, हरियाणवी नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी।
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सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज व बुचौली रोड स्थित एक निजी स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय लोक विरासत कला उत्सव पर हकेंवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने बुधवार को कार्यक्रम शुभारंभ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह ने की। उत्सव के समन्वयक अनिल कौशिक, उपनिदेशक मुकेश उपाध्याय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में सांस्कृतिक गतिविधियां आपके व्यक्तित्व विकास में बहुत बड़ी भूमिका अदा करती है।
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उन्होंने कहा कि आज मिनी भारत के रूप में देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने संदेश दिया कि भाषा, धर्म, जाति व संप्रदाय से ऊपर उठकर सर्वप्रथम अखंड भारत के लिए हमें सार्थक प्रयास करने चाहिए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न प्रदेशों के आए लोक कलाकारों को यदुवंशी ग्रुप से स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. धर्मेश कौशिक ने किया।

लोकनृत्यों की बही बहार
लोक कला विरासत उत्सव के तीसरे दिन सर्वप्रथम उत्तराखंड की टीम ने वहां के पारंपरिक लोक नृत्य की सुंदर प्रस्तुति से उपस्थित विद्यार्थियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। दूसरी ओर हरियाणा प्रदेश की राष्ट्रपति अवार्डी लावनिया फाउंडेशन रेवाड़ी की टीम ने लूर व बधाई नृत्य पर माहौल को गुंजायमान कर दिया। इसी के साथ उत्तरप्रदेश के विशेष लोक लठ्ठ नृत्य की हैरतअंगेज की कोरियोग्राफी ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। मध्यप्रदेश की लोक कलाकारों की टीम ने छाहू नृत्य का सुंदर प्रदर्शन किया। अनिल कौशिक ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के केंद्र उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र का मुख्य प्रयास लुप्त हो रही लोक कलाओं को जीवित रखना है।
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