जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मरीजों को कार्ड बनवाने के बाद दो-तीन घंटे तक लाइन में खड़े रहकर उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसमें सबसे अधिक समस्या महिलाओं को उठानी पड़ती है क्योंकि गर्भवती महिलाएं और सामान्य महिलाओं को देखने की जिम्मेदारी एक डॉक्टर है। इसलिए उन्हें घंटों लाइन में लगकर उपचार कराना पड़ रहा है।
बता दें कि जिला मुख्यालय नारनौल पर जिला नागरिक अस्पताल है। यहां पर भी मरीजों को भी पूरी सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल का दर्जा अब 100 बेड से बढ़कर 200 बेड का हो गया है। इसके बाद भी अभी भी डॉक्टरों समेत अन्य संसाधनों की कमी है। सोमवार को अमर उजाला टीम ने जिला अस्पताल का पड़ताल किया। इस दौरान सभी डॉक्टरों के पास मरीजों की लाइन लगी थी। इसमें सबसे अधिक परेशानी महिलाएं दिखी। एक ही महिला डॉक्टर सामान्य व गर्भवती महिलाओं की जांच कर रही थी। महिलाओं ने बताया कि सुबह आठ बजे ही अस्तपाल पहुंच गई थी। पर्ची बनवाने के बाद 11 बजे तक उपचार नहीं हो पाया। इसमें कुछ ऐसे भी महिलाएं थी, अपने मरीज के स्थान पर लाइन में लगी थी। इसके अलावा फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ व अन्य डॉक्टरों के गेट के बाहर मरीजों की लंबी लाइने लगी रही। सुबह 11 बजे तक 793 मरीजों का पंजीकरण हो चुका था। सोमवार को ओपीडी करीब 1500 रही। हालांकि अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग से ओपीडी की सुविधा है। यहां पर लाइन में दस बुजुर्ग खड़े थे। बच्चे के भी ओपीडी में भीड़ लगी हुई थी।
डॉक्टरों के 24 पद खाली
अस्पताल में 42 मेडिकल आफिसर के पद स्वीकृत है। इसमें से फिलहाल 18 डॉक्टर कार्यरत और 24 पद खाली पड़े हुए हैं। इसके अलावा स्टाफ नर्स के 38 पद स्वीकृत है जबकि 22 नर्स कार्यरत है। इसके अलावा डिप्टी एमएस के दो, डेंटल सर्जन के दो, फार्मासिस्ट के छह, ईसीजी टेक्नीशियन के तीन व रेडियोग्राफर के तीन पद प्रमुख रुप से खाली है।जबकि, अस्पताल में जिले के अलावा राजस्थान से भी काफी संख्या में लोग उपचार कराने के लिए आते हैं। ऐसे में जिला अस्तपाल भी मरीजों का दबाव होता है। डॉक्टर न होने से मरीजों को इमरजेंसी में निजी अस्पतालों की सेवाएं लेनी पड़ती हैं।
एनएचएम के तहत तीन डॉक्टर अस्पताल को मिले हैं। इसमें एक को एसएनसीयू में लगाया गया है। जबकि, स्त्री रोग विशेषज्ञ मेघा मित्तल व विभा को गायनी वार्ड के साथ ओपीडी में लगाया गया है। इससे महिला मरीजों को पहले से राहत मिली है। गंभीर गर्भवती महिलाओं को वार्ड में दिखाने की सुविधा है। सप्ताह का सोमवार पहला दिन होने से मरीजों की संख्या अधिक थी।
- डॉ. राजेश कुमार, एमएस,जीएच नारनौल
दर्जा बढ़ाया लेकिन संसाधन नहीं
मिली जानकारी के अनुसार करीब आठ माह पहले अस्पताल में बेड की संख्या 100 से बढ़कर 200 कर दी गई थी। इसके बाद भी अस्पताल में सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ। जिला अस्पताल होने पर भी आईसीयू जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को यहां पर उपचार नहीं मिल पाता है।
मरीजों से बातचीत -
सुबह आठ बजे से मरीज को लेकर अस्पताल पहुंच गई थी। पर्ची बनवाने के बाद साढ़े बजे तक मरीज को डॉक्टर नहीं देख सके। मरीज की तबीयत ठीक नहीं होने पर उन्हें भी लाइन में लगना पड़ा। -जरीना
दो घंटे में लाइन में लगने के बाद भी नंबर नहीं आया। ऐसे में तामीरदारों के मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में एक ही डॉक्टरों सभी प्रकार के मरीजों को देख रहा है। ऐसे में सभी को परेशानी हो रही है। - अन्नू