महेंद्रगढ़। बिजली निगम ने एक उपभोक्ता को मार्च में 5.81 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल भेज दिया। इस बिल में दो महीने की सामान्य खपत के साथ करीब 5,73,305 लाख रुपये की राशि बकाया या विविध शुल्क के रूप में जोड़ दी गई थी। अब सिविल अदालत ने बुधवार को अगली सुनवाई तक बिल भुगतान पर रोक लगा दी है।
यह बिजली कनेक्शन शर्मिला देवी के नाम पर है जिसका उपयोग मछली पालन के लिए बनाए गए तालाब में किया जा रहा है। 28 मार्च 2026 को जारी इस बिल में कुल 5,81,110 रुपये की मांग की गई थी। इसमें 5,73,305 को विविध शुल्क या बकाया के रूप में दर्शाया गया है।
बिल मिलने के बाद उपभोक्ता ने इसे गलत बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इतनी बड़ी राशि बिना किसी स्पष्ट कारण या दस्तावेजी आधार के जोड़ दी गई है। न तो इसका सही हिसाब दिया गया और न ही कोई स्पष्ट औचित्य बताया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि प्रतिवादियों को भेजे गए समन वापस लौट आए और उनकी ओर से कोई भी व्यक्ति अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद दोपहर 12 बजे तक इंतजार करने के बाद अदालत ने मामले को एकतरफा मानते हुए आगे की कार्यवाही शुरू कर दी।
दस्तावेजों की शुरुआती जांच के बाद अदालत ने बिजली निगम को आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक विवादित 5.73 लाख रुपये की राशि की जबरन वसूली न की जाए और न ही बिजली कनेक्शन काटा जाए।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को नियमित बिजली बिल का भुगतान करना जारी रखना होगा। मामले में अगली सुनवाई अब 17 नवंबर 2026 को होगी जिसमें आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।