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पुलिस ने सामाजिक संस्था के वाहनों के काटे चालान, संस्थाएं बोलीं-अब नहीं बाटेंगे भोजन

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लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों को खाना देने वाले सामाजिक संगठनों के वाहन का चालन करने के बाद सामजिक - फोटो : Narnol
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ट्रैफिक पुलिस ने प्रवासी मजदूरों और गरीब लोगों राशन बांटने वाली सामाजिक संस्था की स्कूटी एवं बाइक का 44500 रुपये का चालान कर दिया। स्कूटी को एसडीएम की ओर से अनुमति मिली हुई है। इससे नाराज तीन सामाजिक संगठनों ने खाना वितरित करना बंद कर दिया। तीनों संस्थाएं सुबह-शाम तीन हजार खाने पैकेट वितरित कर रही थीं। सामाजिक संगठनों के सदस्य वीरवार को उपायुक्त से भी मिले। वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उपायुक्त ने सामाजिक संगठनों को आश्वासन दिया कि वो एक बार चालान भर वाहन छुड़वा लें। लॉकडाउन खुलने के बाद जांच करके चालान की राशि वापस करवा दी जाएगी।
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प्राचीन हनुमान मंदिर कमेटी के अध्यक्ष साहिल भालोटिया ने बताया कि बुधवार की शाम को वह स्कूटी में तेल डलवाने के लिए माजरा चुंगी गए थे। जब पेट्रोल डलवाकर वापस आ रहे थे तभी माजरा चुंगी पर पुलिस ने उनको रोककर दस्तावेज मांगे। पुलिस ने स्कूटी का 11 हजार रुपये का चालान कर दिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि वो प्राचीन हनुमान मंदिर कमेटी से जुड़े हैं। वे गरीब एवं प्रवासी मजदूरों को राशन वितरित करने जा रहे हैं। पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी और बाइक का भी चालान काट दिया। साहिल ने बताया कि प्राचीन हनुमान मंदिर कमेटी, माता मसानी ट्रस्ट तथा पंजाबी कल्याण सभा तीनों संस्थाएं लॉकडाउन के दौरान आपस में पैसे एकत्रित कर गरीब एवं असहाय मजदूरों को सुबह शाम तीन हजार पैकेट खाने के वितरित कर रही थीं। माता मसानी ट्रस्ट की दिन में लगभग 950 पैकेट, प्राचीन हनुमान मंदिर कमेटी एक हजार पैकेट तथा पंजाबी कल्याण सभा सुबह शाम दोनों समय मिलकर एक हजार पैकेट वितरित कर रही थीं। शहर में लगभग आठ से दस सामाजिक एवं धार्मिक संस्थान गरीब, झुग्गी झोपड़ी तथा प्रवासी मजदूरों को खाना वितरित कर रही हैं। सभी ने प्रशासन से अनुमति ली हुई है। संस्थान के कार्यकर्ता सुबह शाम वाहनों पर खाना रखकर ले जाते हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से संस्थाओं को कोई आई कार्ड जारी नहीं किया गया।
हमने स्कूटी की एसडीएम से अनुमति ली हुई थी। उसके बाद भी स्कूटी का चालान कर दिया। जबकि स्कूटी के कागज भी पूरे थे। हम भी जान जोखिम में डालकर गरीब एवं मजदूरों की सहायता कर रहे हैं। पुलिस हमारे साथ ऐसा व्यवहार कर रही है। जब तक हमारे वाहन छोड़े नहीं जाएंगे, हम खाना बांटना चालू नहीं करेंगे।
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-साहिल भालोटिया, प्राचीन हनुमान मंदिर संस्था, महेंद्रगढ़।
- ऐसे बुरे वक्त में अगर सामाजिक संस्थाएं काम नहीं करेगी तो कब करेंगी। इस समय पुलिस प्रशासन को भी सहयोग करना चाहिए। ये संस्थाएं अपने लिए काम नहीं कर रहीं, गरीबों के लिए कर रही हैं। अगर सामाजिक संस्थाओं के वाहनों के चालान कटने लगे तो वो क्यों काम करेंगे।
-टीटू पंजाबी।
वाहनों के दस्तावेज की जांच करना हमारा रूटीन का काम है। उन्होंने नहीं बताया था कि वे सामाजिक संस्था से जुड़े हैं। अब हम सामाजिक संस्थाओं को बोल देंगे कि अनुमति की एक-एक कॉपी हमें भी दे दें, ताकि उनका ध्यान रखा जा सके।
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- नवल किशोर शर्मा, थाना प्रभारी, महेंद्रगढ़।
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