नारनौल। महाराजा शूर सैनी जयंती कार्यक्रम के लिए नारनौल डिपो से 86 बसों का संचालन किया गया। कार्यक्रम के लिए बसों की पूर्ति के लिए छोटे व ग्रामीण रूट पर संचालित बसों की संख्या में कटौती की गई। इसके अलावा रेवाड़ी व दिल्ली रूट पर भी कम बसों का संचालन हुआ। जिसके कारण आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार नारनौल डिपो से 164 बसों का संचालन होता है। इसमें से करीब 84 बसों का संचालन छोटे रूट पर व करीब 70 बसों का संचालन लंबे रूट पर किया जाता है। लेकिन नारनौल डिपो से 86 बस विभिन्न स्थानों से लोगों को कार्यक्रम स्थल तक ले जाने के लिए संचालित की गई। वहीं केवल 68 बस आमजन के लिए संचालित की गई।
कार्यक्रम के लिए अन्य जिलों से पहुंची 325 बसें
शूर सैनी जयंती कार्यक्रम के लिए 325 रोडवेज बसें अन्य जिलों से भी पहुंची। इनमें रेवाड़ी, झज्जर, दादरी, भिवानी व रोहतक डिपो से 45-45 बसों सहित कुल 225 बसें कार्यक्रम के लिए नारनौल भेजी गई थी। वहीं अन्य जिलों से कार्यक्रम के लिए आए लोगों के लिए अनेक डिपो की करीब 100 बसें कार्यक्रम स्थल तक पहुंची।
इन रूट पर रही सबसे अधिक समस्या
नांगल चौधरी, निजामपुर, महेंद्रगढ़, बहरोड, कनीना, अटेली रूट पर पड़ने वाले गांव के लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस रूट पर बसों का संचालन बहुत कम रहा। वहीं, दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़ सहित अनेक लंबे रूट पर भी बसों का संचालन सामान्य दिनों की तुलना में कम रहा।
लोगों ने ऑटो में किया सफर
छोटे व ग्रामीण रूट पर बसों का संचालन नहीं होने के कारण आमजन ऑटो में दोगुना किराया देकर गंतव्य तक पहुंचे। वहीं छोटे रूट पर संचालित निजी बसों में और दिल्ली-झुंझनु रूट पर संचालित राजस्थान रोडवेज में लोगों ने सफर किया।
दोपहर 2 बजे से बस का इंतजार कर रही थी और साढे तीन घंटे इंतजार करने के बाद बस मिल पाई। जिस कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिमला, गांव-बिहारीपुर
निजामपुर रूट पर बस का संचालन नहीं किया गया। जिस कारण ऑटो में दोगुना किराया देकर सफर करना पड़ा।
केसर देवी,गांव-टीबा बसई
कार्यक्रम के लिए नारनौल डिपो से 86 बसें भेजी गई थी। छोटे रूट पर संचालित बसों के फेरों की संख्या में बढ़ोतरी की गई थी ताकि आमजन को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
सतीश कुमार,सीआई, नारनौल डिपो।