महेंद्रगढ़। वैज्ञानिक उत्कृष्टता किसी भी प्रकार से लिंग पर निर्भर नहीं होती। शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व है कि वे महिला वैज्ञानिकों के लिए समावेशी व सहयोगात्मक वातावरण विकसित करें। यह बात हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कही।
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में फ्रॉम बेरियर्स टू ब्रेकथ्रूज वूमेन रिडिफाइनिंग साइंस विषय पर केंद्रित पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ व रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल का सहयोग रहा।
इससे पूर्व में महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. विद्युल्लता पेड्डिरेड्डी ने स्वागत भाषण में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समावेशी अकादमिक परिवेश के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का आयोजन विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों को उजागर करने व उनके परिवर्तनकारी योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से किया गया, जिसमें वैज्ञानिक करियर में पहुंच, अवसरों व मान्यता पर विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की। इसमें कार्यक्रम की संयोजक डॉ. नम्रता ढाका, आयोजन सचिव डॉ. इंद्रजीत कौर, डॉ. मनीषा पांडेय ने आयोजन के क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी की।
पैनल चर्चा में ये रहे शामिल
पैनल चर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय (साउथ कैंपस) में जेनेटिक्स विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. तपस्या श्रीवास्तव, हकेंवि में भौतिकी एवं खगोल भौतिकी विभाग की विभागाध्यक्ष व आईआईसी की अध्यक्ष प्रो. सुनीता श्रीवास्तव, हकेंवि की वरिष्ठ प्रो. एवं रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेल की निदेशक प्रो. नीलम सांगवान व आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. सुरेंद्र सिंह सहित देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् सम्मिलित हुए।