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Mahendragarh-Narnaul News: पाली ने केंद्रीय विश्वविद्यालय को 488 एकड़ भूमि दी, ग्रामीणों में नाम न लिखने का मलाल बरकरार

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फोटो संख्या:51 गांव जांट-पाली ​स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय। संवाद
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महेंद्रगढ़। पाली-जांट गांव स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में कहीं भी पाली गांव का नाम दर्ज नहीं किया गया है। ग्रामीण विवि को महेंद्रगढ़ की बजाय जांट-पाली के नाम से जानने की मांग उठा रहे हैं। साथ ही लंबे समय में नौकरियों, पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीटें निर्धारित करने की भी मांग उठा रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पाली ग्राम पंचायत ने 488 एकड़ जमीन निशुल्क दी थी जबकि शेष भूमि जांट गांव से ली गई थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय की पहचान में किसी भी गांव का नाम शामिल नहीं किया गया जो उनके अनुसार अन्याय है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में मौखिक रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि स्थानीय युवाओं को ग्रुप डी की नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। कुछ युवाओं को रोजगार मिला भी लेकिन अपेक्षित स्तर पर स्थानीय लोगों को अवसर नहीं मिल सके। उनका कहना है कि अधिकतर नौकरियां बाहरी लोगों को दी गईं जिससे क्षेत्र के युवा बेरोजगार रह गए।
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ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि विश्वविद्यालय में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं और विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दौरान क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए सीटें निर्धारित की जाएं।
लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय निर्माण के समय जो वादे किए गए थे, वे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। इससे गांव पाली और आसपास के ग्रामीणों में असंतोष बना हुआ है और वे जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि विश्वविद्यालय बनने से क्षेत्र के विकास और रोजगार की उम्मीदें जगी थी लेकिन वर्षों बाद भी गांव के युवाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि योग्यता के अनुसार स्थानीय युवाओं को विश्वविद्यालय में रोजगार के अवसर मिलने चाहिए।
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जानिये गांव के लोगों का मलाल
हमारे गांव ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए 488 एकड़ भूमि दी थी। उस समय ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा त्याग किया था लेकिन आज गांव के नाम को नजरअंदाज किया गया है। विश्वविद्यालय में पाली गांव का नाम जरूर शामिल होना चाहिए। साथ ही हमारे युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिलना चाहिए।-देशराज सिंह फौजी, सरपंच, पाली

गांव में विवि आने से हमारी जमीन भी गई और युवाओं का रोजगार भी छिन गया है। पहले हम खेती और पशुपालन करके अपना जीवन आसानी से चला लेते थे लेकिन अब उसके लिए भी गांव में जगह नहीं बची है। शिक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए हमने अपनी जमीन दी थी लेकिन आज गांवों का नाम और सम्मान कहीं दिखाई नहीं देता। -सुरेंद्र सिंह, पूर्व सरपंच, पाली
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हमने अपने गांव के हक के लिए वर्ष 2012 में 71 दिन का धरना दिया था लेकिन केवल आश्वासन देकर दोनों गांवों को दरकिनार कर दिया गया। अब करीब 10 साल में भर्ती और टेंडर में मिलने वाला आरक्षण भी समाप्त कर दिया गया है। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार इस मामले पर संज्ञान लेकर पुराने नियम लागू करे ताकि गांवों को सम्मान और युवाओं को रोजगार मिल सके।-कैलाश पाली, ग्रामीण
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अगर युवाओं को रोजगार मिले तो गांव में युवा बेरोजगार नहीं होंगे। साथ ही अन्य क्षेत्र के लोगों को रोजगार देना पाली गांव के साथ धोखा है। टेंडर से गांव का आरक्षण हटाना बिल्कुल गलत है और विवि प्रशासन को फिर से इसे लागू करना चाहिए। विवि को ग्राम पंचायत ने जमीन दी है तो विवि में ग्रामीणों को रोजगार मिलना चाहिए। साथ ही जिस गांव में विवि स्थापित है उनको ही अनदेखा कर विवि प्रशासन पंचायतों की तोहिद कर रहा है।
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अगर युवाओं को रोजगार मिले तो गांव में बेरोजगारी कम हो जाएगी। अन्य क्षेत्र के लोगों को रोजगार देना पाली गांव के साथ अन्याय और धोखा है। टेंडर से गांव का आरक्षण हटाना पूरी तरह गलत है जिसे विवि प्रशासन को दोबारा लागू करना चाहिए। ग्राम पंचायत ने विश्वविद्यालय के लिए जमीन दी है, इसलिए स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिलना चाहिए। जिस गांव में विवि स्थापित है उन्हें अनदेखा करना सही नहीं है।-सुबोध, ग्रामीण

फोटो संख्या:51 गांव जांट-पाली स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव जांट-पाली स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव जांट-पाली स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव जांट-पाली स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव जांट-पाली स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय। संवाद

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