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Mahendragarh-Narnaul News: निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने पर भड़का आक्रोश

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फोटो संख्या:67- हड़ताल के  चलते खाली पड़ा  बिजली निगम  कार्यालय --संवाद
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नारनौल। गुरुग्राम और नूंह डिवीजन का समानांतर लाइसेंस निजी कंपनी को सौंपने के फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने वीरवार से हड़ताल शुरू कर दी। बिजली कर्मी व इंजीनियर्स सांझा मंच के आह्वान पर यह तीन दिवसीय हड़ताल 22 से 24 अक्तूबर तक चलेगी।
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केंद्रीय परिषद के सह-सचिव सुभाष रोहिल्ला व एएचपीसी सर्कल सचिव किरोड़ी मल सैनी का कहना है कि इससे पहले 10 अगस्त 2026 को ऊर्जा मंत्री और यूनियनों के शीर्ष नेतृत्व के बीच आम सहमति बनी थी। उसी भरोसे पर 11, 12 और 13 अगस्त की प्रस्तावित हड़ताल को दो महीने के लिए टाल दिया गया था।
आरोप है कि सरकार ने अपनी बात से पलटते हुए 19 अक्तूबर को लाइसेंस निजी कंपनी को दे दिया। कर्मचारियों की मांग है कि यह लाइसेंस तुरंत रद्द हो। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो हड़ताल अनिश्चितकाल के लिए भी बढ़ाई जा सकती है।
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डिप्लोमा एसोशिएन के जिला प्रधान सत्यपाल के अनुसार जिले में 602 एचकेआरएन, 544 नियमित एएलएम व लाइनमैन, 61 जेई, 12 एसडीओ, 2 कार्यकारी अभियंता और 1 अधीक्षक अभियंता सहित सभी कर्मचारी व अधिकारी हड़ताल में शामिल रहे।
ग्रामीण एसडीओ लोकेश कुमार ने कहा कि सरकार अप्रेंटिस और अप्रशिक्षित लोगों को बिजली लाइनों की जिम्मेदारी सौंप रही है जिससे हादसों का खतरा बना रहेगा। उनके मुताबिक जायज मांगों को अनसुना किया जा रहा है और जब तक वे पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी।
सिंघाना रोड स्थित अधीक्षक अभियंता कार्यालय पर कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। सांझा मोर्चा को पब्लिक हैल्थ, सफाई कर्मचारी, सर्व कर्मचारी संघ, रोडवेज, हरियाणा कर्मचारी महासंघ, जन उपभोक्ता मंच, पोलिटेक्निक एसोसिएशन और रिटायर्ड कर्मचारी संघ ने भी समर्थन दिया है।
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फोटो संख्या: 66 से 68
मांगें नहीं मानने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
महेंद्रगढ़ डिवीजन प्रांगण में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने निजी कंपनियों को बिजली वितरण के लाइसेंस देने का फैसला रद्द करने की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो हड़ताल अनिश्चितकाल के लिए बढ़ सकती है। जिले में दो हजार कर्मचारी हड़ताल पर डटे रहे।
कर्मचारी नेता महावीर पहलवान ने कहा कि निजीकरण का असर किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। उन्होंने सरकारी बिजली निगमों को मजबूत करने, रिक्त पद भरने, लंबित मांगें पूरी करने और किसी बड़े नीतिगत बदलाव से पहले बातचीत करने की मांग रखी।
हड़ताल से कनीना क्षेत्र के गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। पानी की मोटरें नहीं चलने से ग्रामीणों और पशुओं के लिए पानी जुटाना मुश्किल हो गया। सरसों की बिजाई के बीच किसानों को सिंचाई की चिंता सता रही है। स्थिति देखने के लिए एसडीएम और डीएसपी ने पावर हाउस का दौरा किया। इस मौके पर विनोद यादव, राजेंद्र नौताना, नवीन यादव, मनोज यादव, सरजीत खटाणा, हवासिंह, अजीत प्रधान, विक्रम, कृष्ण, सोमवीर, प्रवीण प्रधान और शेर सिंह सहित कई कर्मचारी नेता मौजूद रहे। संवाद

फोटो संख्या:67- हड़ताल के  चलते खाली पड़ा  बिजली निगम  कार्यालय --संवाद

फोटो संख्या:67- हड़ताल के  चलते खाली पड़ा  बिजली निगम  कार्यालय --संवाद

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