फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानक पूरे नहीं करने वाले 72 स्टोन क्रशरों को बंद कराने के आदेश

विज्ञापन
विज्ञापन
एनजीटी ने जिले में मापदंडों पर खरे न उतरने वालेे 72 क्रशरों को बंद कराने के निर्देश दिए है। इस बारे में एनजीटी में 24 जुलाई को सुनवाई हुई थी। प्रशासन को ऐसे क्रशरों की रिपोर्ट पांच सितंबर से पहले एनजीटी में देनी होगी।
विज्ञापन

बता दें कि खतोली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता तेजपाल ने एनजीटी में एक याचिका दायर की थी। जिसमें जिले में स्टोर क्रशरों को गलत तरीके से लगाने की बात कही गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने 24 जुलाई से पहले डीसी को स्टोन क्रशरों की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिए थे। तेजपाल के वकील राजकुमार ने बताया कि एनजीटी ने डार्क जोन व अन्य रिपोर्ट को अपर्याप्त व नाकाफी बताते हुए नए सिरे से पूरी रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। जिस पर सरकार ने 72 क्रशरों की रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी है।
क्या है पूरा मामला-
तेजपाल यादव ने सितंबर 2018 में वकील राजकुमार के माध्यम से स्टोन क्रशरों के विरोध में एक याचिका एनजीटी में दायर की थी। जिसमें स्टोन क्रशरों के आबादी क्षेत्र, वन क्षेत्र व शिक्षण संस्थान आदि से दूरी संबंधित दूरी मापदंड व डार्क जोन सहित अन्य मुद्दे उठाए गए थे। इस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने जांच के आदेश दिए गए थे। 12 दिसंबर 2018 को जस्टिस आदर्श गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा तीन स्टोन क्रशरों की एनओसी रद्द की थी। वहीं याचिकाकर्ता की मांग के अनुसार जिले के स्टोन क्रशरों की जांच के आदेश दिए थे। इस पर हरियाणा के मुख्य सचिव द्वारा एनजीटी को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक तीन अधिकारियों पर गाज भी गिर चुकी है। जिसमें दो तहसीलदार चार्जशीट हुए व डीटीपी का एक जेई सस्पेंड भी हो चुका है। वकील ने बताया कि एनजीटी में जिला प्रशासन द्वारा बार-बार समय मांगा गया। इसी के तहत नगर परिषद के नक्शे में काट छांट करके प्रारंभिक अधिसूचना जारी हुई। नौ अप्रैल 2019 को सरकार द्वारा एक बार फिर समय मांग लिया गया। वकील राज कुमार ने बताया कि प्रशासन ने एनजीटी को 72 स्टोन क्रशरों के हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन (11 मई 2016) अनुसार मापदंड नहीं पूरे करने की रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें 18 स्टोन क्रशरों के बोरवेलों को सील करने की भी रिपोर्ट थी। रिपोर्ट में जिला प्रशासन ने कहा कि केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण के साथ संयुक्त समिति इन स्टोन क्रशरों द्वारा भूजल के अवैध निकासी के लिए पर्यावरण क्षति का भी आंकलन करेगी। वकील के अनुसार पहले प्रशासन द्वारा सौंपी गई दो रिपोर्टों को एनजीटी खारिज कर चुका है। तीसरी रिपोर्ट भी सिर्फ दूरी मापदंड को छोड़कर सभी पहलुओं पर विफल रही। जिस पर एनजीटी ने जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशरों को जल्द बंद करके रिपोर्ट सौंपने के साथ ही, इन स्टोन क्रशरों के खिलाफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की एवज में हर्जाना वसूले जाने व सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने के आदेश भी दिए। इसके साथ ही पर्यावरण नियमों की अनुपालना को देखते हुए जिले की वायु गुणवत्ता, वाहन क्षमता, लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव आदि सभी पहलुओं पर सुनवाई पांच सितंबर को होगी। एनजीटी ने जिला उपायुक्त व हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी को भी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए।
विज्ञापन

याचिकाकर्ता नेे खुशी जताई
तेजपाल यादव ने कहा कि 72 स्टोन क्रशरों के बंद होने के आदेश के साथ ही अभी डार्क जोन के मुद्दे पर काफी स्टोन क्रशरों पर गाज गिरना बाकी है। तेजपाल यादव ने एनजीटी के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इतनी बड़ी संख्या में स्टोन क्रेशरों के बंद करने का आदेश पिछले 15 महीनों से जारी सामाजिक व कानूनी जन संघर्ष की जीत है। बता दें कि एक जुलाई को नांगल चौधरी क्षेत्र के 35 गांवों के हजारों लोगों के नारनौल में स्टोन क्रशरों के विरोध में प्रदर्शन किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें