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ऑनलाइन होंगे दाखिले, डाक्यूमेंट जमा कराने के लिए भी नहीं आना पड़ेगा कॉलेज

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कॉलेजों में प्रथम वर्ष के दाखिलों के लिए अपनाई जाने वाली ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए मॉक टेस्ट किया जा रहा है। सितंबर माह के पहले सप्ताह में दाखिला प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को कॉलेज में दाखिला लेने के लिए कैंपस में नहीं आना होगा। सभी प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी होंगी। इस बार दस्तावेजों की मूल प्रति को जमा कराने के लिए भी कॉलेज नहीं आना पड़ेगा।
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कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया के लिए तैयारी शुरू हो गई है। पहले चरण में प्रथम वर्ष के दाखिले होंग। जिसमें बीए, बीकॉम, बीएससी के दाखिले किए जाएंगे। जिसके लिए नई वेबसाइट तैयार की जा रही है। फिलहाल इस साइट का मॉक टेस्ट किया जा रहा है। कॉलेजों से इस साइट के बारे में फीडबैक मांगा गया है। साइट की कमियों को दूर किया जा रहा है। कॉलेजों में पिछले चार साल से दाखिले ऑनलाइन किए जा रहे हैं। जिसमें आवेदन लेकर मेरिट लिस्ट ऑनलाइन तैयार होती है। फीस जमा कराने तथा डाक्यूमेंट की वैरिफिकेशन के लिए विद्यार्थियों को कॉलेज आना होता है। इस बार यह दोनों कार्य भी ऑनलाइन ही किए जाएंगे। विद्यार्थी को कॉलेज या बैंक में नहीं जाना पड़े इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। फीस जमा कराने के लिए विद्यार्थी को तीन से चार अलग अलग ऑप्शन दिए जाएंगे। महेंद्रगढ़ जिले में सरकारी तथा गैर सरकारी 20 कॉलेज हैं। जिसमें प्रथम वर्ष के दाखिले होंगे। सभी कॉलेजों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रक्रिया रहेगी
लिंक होगा बोर्ड, सीबीएससी का रिजल्ट
-नई साइट के साथ हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ,सीबीएससी का 12वीं का रिजल्ट उच्चतर शिक्षा की वेबसाइट के साथ लिंक किया जाएगा। जिसमें विद्यार्थी अपना रोल नंबर डालेंगे तो साइट से उसकी पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। पिछले तीन साल का रिजल्ट लिंक किया जाएगा।
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एनआईसी से जारी प्रमाण पत्र भी ऑनलाइन
दाखिले में अनुसूचित वर्ग, पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को अपने प्रमाण पत्र लगाने होते हैं। जिनको मेरिट सूची में शामिल किया जाता है। वेबसाइट के साथ एनआईसी को भी लिंक किया जाएगा। जिससे प्रमाण पत्र की वैधता की जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। विद्यार्थी को आवेदन के साथ प्रमाण पत्र की प्रति लगाने क े साथ उसका यूनिक कोड नंबर भी भरना होगा।
तीन महीने की देरी
हर वर्ष जून माह में कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। इस बार कोरोना के चलते यह प्रक्रिया तीन महीने देरी से शुरू होगी। जिसके चलते कॉलेजों में पहले सेमेस्टर में पाठ्यक्रम कम करने का फैसला लिया है। पाठ्यक्रम घटाए जाने को अंतिम फैसला उच्चतर शिक्षा निदेशालय ही लेगा।
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