फोटो संख्या:70- डॉ. निलेश मुद्ग्ल--स्रोत- स्वयं
सीमहेंद्रगढ़। जीवन में भागदौड़ और तनाव में हास्य योग एक ऐसा सरल, सुलभ और प्रभावी उपाय है जो जीवन को सहज और आनंदमय बनाता है। बच्चे दिन में लगभग 300 बार हंसते हैं, जबकि वयस्क केवल 10 से 15 बार, काम का बोझ बढ़ने को आमतौर पर तनाव का कारण माना जाता है। हास्य का जीवन में कम हो जाना रोगों को बढ़ाने वाला कारक है। एक मिनट की जोरदार हंसी लगभग 10 मिनट के व्यायाम के बराबर होती है।
योग विज्ञान में पीएचडी और योगायु लाइफ के फाउंडर महेंद्रगढ़ निवासी डॉ. निलेश मुदगल ने बताया कि हास्य योग एक वैज्ञानिक पद्धति है। इसके माध्यम से बिना किसी मजाक या कॉमेडी के जानबूझकर हंसने का अभ्यास किया जाता है। यह प्राचीन योगशास्त्र और आधुनिक मनोविज्ञान का अद्भुत समन्वय है। इसमें गहरी सांसों, हल्की शारीरिक गतिविधियों और सामूहिक हंसी का संयोजन होता है।
उन्होंने बताया कि हंसने से फेफड़े अधिक ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं, रक्त संचार बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। शोध में खुलासा हुआ है कि एंडोर्फिन, डोपामिन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स का स्राव होता है, जो दर्द कम करने और मूड बेहतर करने में सहायक होते हैं। हंसी तनाव और चिंता को कम करती है, अवसाद में राहत देती है और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाती है। यह मन को हल्का करती है और सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है। यह प्राकृतिक दर्द निवारक की तरह काम करती है।