केंद्र एवं प्रदेश सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। लेकिन हकीकत यह है कि शहर के राजकीय महिला महाविद्यालय की छात्राओं के पढ़ने के लिए कमरे नहीं हैं। एक हॉल में चार-चार कक्षाएं पढ़ाई जा रही हैं जबकि कुछ कक्षाएं बाहर बरामदे में भी लग रही है। कड़ाके ठंड में छात्राओं को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। महाविद्यालय में इस बार शुरू की गई साइंस संकाय के लिए स्टाफ और लैब की सुविधा भी नहीं हैं। महाविद्यालय में 17 नियमित और 19 लेक्चर्र एक्टेंशन पर काम कर रहे हैं। ऐसे में कैसे क्षेत्र की बेटियां पढे़ंगी।
बता दें कि राजकीय महिला महाविद्यालय पहले शहर के बीच था। वहां के भवन में भी छात्राओं के लिए कमरों की कमी थी। करीब 6 करोड़ रुपये से 2014 में कॉलेज का नया भवन बनाया गया था। 27 जुलाई 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तत्कालीन शिक्षामंत्री गीता भुक्कल की अध्यक्षता में भवन का उद्घाटन किया गया था। दो मंजिला भवन बनाएगा गया था। जिसमें मात्र दस कक्ष बनाए गए थे। प्रति वर्ष महाविद्यालय में कोर्स और बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है जिससे ये कमरे नाकाफी लग रहे थे। बाद में 2018 में रूसा की ग्रांट 70 से 80 लाख रुपये से महाविद्यालय भवन के पीछे चार कमरे और बनाए गए थे। उसके बाद भी कमरों की संख्या कम रहती है। महाविद्यालय में एक साथ 30 कक्षाएं लगती हैं जबकि कमरें मात्र 14 हैं। जिससे लेक्चरर को बरामदे में बैठाकर कक्षा लेनी पड़ती है। इसके अलावा चार-चार कक्षाएं एक ही हॉल में लगाई जा रही हैं, जिससे छात्राएं परेशान हैं। उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
महाविद्यालय में न साइंस लैब और न ही ज्योग्राफी लैब
प्रदेश सरकार ने इस साल से महाविद्यालय में साइंस संकाय की मेडिकल एवं नॉन मेडिकल कक्षाएं शुरू की हैं। छह महीने बाद भी महाविद्यालय में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बोटनी और जुलोजी की लैब नहीं बन पाई है। नाम मात्र के उपकरण रखें हैं। उनसे प्रायोगिक कक्षा लगाकर अपनी इतिश्री कर लेते हैं। इसके अलावा छात्राओं को उधार के टीचर हायर कर पढ़ाया जा रहा है। महाविद्यालय में ज्योग्राफी लैब की सुविधा भी नहीं है।
राष्ट्रीय भाषा हिंदी का नहीं नियमित प्राध्यापक
राजकीय महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय भाषा हिंदी का एक भी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं है। एक्सटेंशन लेक्चरर से ही काम चलाया जा रहा है। महिला कॉलेज में लगभग 33 लेक्सरर के पद स्वीकृत हैं। लेकिन उनमें से 17 ही नियमित हैं जबकि 19 लेक्चरर एक्टेशन पर हैं। उन्हीं से काम चलाया जा रहा है।
इन संसाधनों की है आवश्यकता
महाविद्यालय में 20 कमरों की आवश्यकता है जिससे छात्राएं ठीक से पढ़ सकें। इसके अलावा ज्योग्राफी की दो लैब, फिजिकस, केमिस्ट्री, बोटनी, जुलोजी की एक-एक लैब, छात्राओं के लिए कॉमन रूम, स्टाफ रूम, सभागार, कैंटीन आदि की आवश्यकता है।
बिना इंफ्रास्ट्रेक्चर कैसे मिलेगा ए+ ग्रेड
किसी भी महाविद्यालय को नेक से ए+ ग्रेड दिलाने के लिए इंफ्रास्ट्रेक्चर की अहम भूमिका होती है। अगर महाविद्यालय का इंफ्रास्ट्रेक्चर अच्छा होता है तो उसके अलग से अंक मिलते हैं। 2017 में नेक टीम ने महाविद्यालय का निरीक्षण किया था लेकिन इंफ्रास्ट्रेक्चर में कमी के कारण महाविद्यालय को बी+ ग्रेड मिला था। अतब नेक टीम 2022 में इसका दौरा करेंगी।
पांच छह बार भेजा जा चुका है रिमाइंडर
राजकीय महिला महाविद्यालय की ओर से पांच छह रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। 2018 से हम रिमाइंडर भेज रहे हैं। जनवरी 2020 में भी हमने रिमाइंडर भेजा है। सरकार बजट मंजूर करेगी तभी आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
- संजय जोशी, कार्यकारी प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, महेंद्रगढ़।
कड़ी सर्दी में हमें बाहर बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। मुझे इस महाविद्यालय में पढ़ते तीसरा वर्ष है। लेकिन तीन वर्षों में मैंने कोई बदलाव नहीं देखा। महाविद्यालय में कमरों कमी के कारण सभी कक्षाओं को कमरे नहीं मिल पाते। - अंशु यादव, बीए फाइनल वर्ष
सुविधा के नाम पर महाविद्यालय का बुराहाल है। एक हॉल में चार-चार कक्षाएं एक साथ पढ़ाई जा रही है। इन कक्षाओं में आवाज एक दूसरे की क्रास होती है जिससे कुछ समझ नहीं आता। ऐसे में पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
- पूजा शर्मा, बीए, फाइनल वर्ष
महाविद्यालय में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। बेटी तो बच रही है परंतु उनको सरकार पढ़ाए तो सही। महाविद्यालय में बिना स्टाफ और लैब के कैसे पढ़ेंगी।
- सविता, बीए प्रथम वर्ष
महाविद्यालय में कई कमियां हैं। इन कमियों के लिए मैं इन कमियों को लेकर कई बार प्राचार्य को इस बारे में अवगत करवा चुकी हूं। अभाविप प्रदेश की पहली भाजपा सरकार में शिक्षामंत्री रहे रामबिलास शर्मा को भी अवगत कराया था। अब दोबारा इन कमियों को दूर करवाने का प्रयास करेंगे।
- आरती, नगर मंत्री अभाविप।