सतनाली। क्षेत्र के किसानों को बाजरा बिक्री के लिए इस बार दर-दर भटकना पड़ रहा है। पहले तो सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ी थी।
किसानों को आढ़तियों व व्यापारियों को औने-पौने दामों पर अपने खून पसीने की कमाई को बेचने पर मजबूर होना पड़ा। अब कम दामों पर उपज बिक्री करने के बाद भी व्यापारियों व आढ़तियों की ओर से किसानों से जे-फार्म के नाम पर प्रति क्विंटल 75 रुपये की मांग की जा रही है। ऐसे में किसान भी मजबूर हो रहा है।
कई व्यापारियों व आढ़तियों की ओर से किसानों से जे-फार्म के नाम पर पहले ही 75 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसे वसूल लिए लेकिन अब जेफार्म भी नहीं दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि व्यापारियों व आढ़तियों की ओर से जेफार्म उपलब्ध कराने के नाम पर पहले ही उपज खरीद ली थी। व्यापारियों ने मनमाने भाव पर उपज खरीदकर किसानों की पहले ही कमर तोड़ दी है अब जेफार्म उपलब्ध नहीं कराने से किसानों के समक्ष भावांतर भरपाई का पैसा लेने के लिए संकट खड़ा हो गया है।
किसानों का कहना है कि जे फार्म की समस्या पर जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए ताकि दिवाली पर्व पर किसान भी इस पर्व को खुशी से मना सके।
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अबकी बार मंडी न लगने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियों व व्यापारियों के कहने के अनुसार अनाज मजबूरी में बेचना पड़ रहा है। अब जे-फार्म के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। यदि भटकना नहीं चाहते तो भावांतर के लिए 75 रुपये देकर प्रति क्विंटल के हिसाब से जे फार्म कटवाना मजबूरी बन गया है। - बाली शर्मा नांवां
बाजरे की सरकारी खरीद की मंडी न लगने के कारण क्षेत्र के किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिला। किसान को बाजरा औने-पौने दाम पर बेचना पड़ा। अब आढ़तियों व स्थानीय व्यापारियों की ओर से जेफार्म के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। किसान इस बार कभी उपज बिक्री तो कभी खाद को लेकर दर-दर भटक रहा है। - बलबीर नांवां
पहले तो किसान को बाजरा बेचने के लिए दिन प्रतिदिन सरकारी खरीद के लिए इंतजार करना पड़ा जब सरकारी खरीद नहीं हुई तो निजी एजेंसी की ओर से खरीद औने-पौने दामों पर की जा रही है। अब जे-फार्म के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार से मांग है कि किसानों की खरीदी गई उपज का जेफार्म उपलब्ध कराया जाए। - सुरेश कुमार नांवां
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सरकार को किसानों की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए ताकि किसान को आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना ना करना पडे़। हो सके तो सरकार को हर बार सरकारी खरीद करनी चाहिए ताकि किसानों को फसल बेचने के लिए किसी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पडे़।- कैलाश, बीर सिंहवास
- वर्जन:
मंडी में निजी खरीद बाजरे की बोली के अनुसार की जा रही है। जे फार्म का काम भी आढ़तियों व व्यापारियों की ओर से करवाया जा रहा है। यदि किसी प्रकार की समस्या आती है तो तुरंत समस्या का हल किया जाएगा।- संदीप यादव, ऑक्सन रिकार्डर, मार्केट कमेटी, सतनाली
फोटो संख्या:64- अनाज मंडी सतनाली में रखा बाजरे से भरे बैग--संवाद
फोटो संख्या:64- अनाज मंडी सतनाली में रखा बाजरे से भरे बैग--संवाद
फोटो संख्या:64- अनाज मंडी सतनाली में रखा बाजरे से भरे बैग--संवाद
फोटो संख्या:64- अनाज मंडी सतनाली में रखा बाजरे से भरे बैग--संवाद