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चिकित्सकों का टोटा तो कहीं जर्जर है बिल्डिंग

Tue, 05 Apr 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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चिकित्सकों की कमी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सूबे का सबसे पुराना जिला महेंद्रगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ता जा रहा है। जिले में कहीं पर जर्जर बिल्डिंग में अस्पताल चल रहा है तो कहीं पर चिकित्सकों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। ये हालत काफी समय से है। कांग्रेस शासन में स्वास्थ्य मंत्री इसी जिले के थे लेकिन तब भी चिकित्सकों की कमी खत्म नहीं हो पाई थी। अब भाजपा सरकार में भी यही हाल है।महेंद्रगढ़ के लाचार, बीमार मरीज सरकार से चिकित्सकों की तैनाती की गुहार लगा रहे हैं। महेंद्रगढ़ और कनीना सब डिवीजनों में करीब छह लाख की आबादी है, पर डाक्टरों की संख्या मात्र 10 है। बावजूद इसके यहां के लोगों ने जीने का जज्बा नहीं छोड़ा है, उम्मीद नहीं छोड़ी है। बस उनकी एक ही मांग है, हमें डाक्टर चाहिए।
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हर रोज होती है 400 की ओपीडी
महेंद्रगढ़ सब डिवीजन में 104 गांव और कनीना उपमंडल के अंतर्गत 102 गांव हैं। दोनों सब डिवीजनों की जनसंख्या करीब पांच लाख है। अगर लाखों की इस जनसंख्या पर डाक्टरों की गिनती करें तो यह अंगुलियां भी ज्यादा हैं। बता दें कि महेंद्रगढ़ अस्पताल में रोजाना 400, कनीना में 250 और सतनाली में 200 तक मरीजों की ओपीडी है।

यूं खुलती हैं सीएचसी और पीएचसी
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार सीएचसी एक लाख की जनसंख्या पर होती है। पीएचसी 30 हजार की संख्या और सब सेंटर पांच हजार की जनसंख्या पर खोली जाती है। एक पीएचसी के नीचे पांच पांच सब सेंटर होते हैं, यहां पर एएनएम व एमपीएचडब्ल्यू स्टाफ होता है।
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डाक्टर देने वाला जिले में डाक्टर का है अभाव
डाक्टर देने वाला जिला महेंद्रगढ़ में ही डाक्टरों का अभाव हैं। हर वर्ष जिले से लगभग 150 विद्यार्थियों का पीएमटी में सलेक्शन होता है। महेंद्रगढ़ जिला अभी तक न जाने कितने डाक्टर दे चुका है लेकिन उसी जिले के मरीज कहीं दूसरे राज्यों में जाकर अपना इलाज करवाते हैं।
इतना ही डाक्टर लगने के बाद भी यहां से छोड़कर चले जाते हैं। सूत्रों से पता चला है कि प्रदेश सरकार में चिकित्सकों का कैडर नहीं बना रखा, उनके अनुसार स्पेशलिस्ट और सामान्य चिकित्सक बराबर हैं। अगर कैडर और पेय स्केल बढ़ा दिया जाए तो चिकित्सक छोड़कर नहीं जाएंगे बल्कि दूसरे राज्यों के चिकित्सक भी यहां आकर सेवा देने लगेंगे।

नहीं है जिले में सर्जन
जिले में स्वास्थ्य विभाग की हालत एकदम खस्ता है। इसको संभालने वाला कोई नहीं है जबकि प्रदेश सरकार का एक मंत्री, एक डिप्टी स्पीकर तथा दो विधायक इस जिले ने दिए हैं। पूरे जिले में एक भी सिविल सर्जन नहीं हैं। जिले के हालात यह है कि दूसरे जिलों से सर्जन मंगवाने पड़ते हैं। महेंद्रगढ़ में सिविल अस्पताल में बृहस्पतिवार को सर्जन आता है वह दोपहर बाद। महिलाएं सुबह सात बजे आकर अस्पताल में बैठ जाती हैं और काफी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। जबकि जिले में मात्र तीन स्पेशलिस्ट चिकित्सक है। एक बाल रोग विशेषज्ञ, स्किन विशेषज्ञ तथा एक फिजीशियन। जिले के किसी भी अस्पताल में ईएनटी, स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलोजिस्ट, डेंटिस्ट, पेट रोग विशेषज्ञ नही है। लोगों को बाहर जाकर महंगा इलाज करवना पड़ता है। एक मामूली ऑपरेशन पर 20 हजार रुपये तक का खर्चा बैठ जाता है।

न उपकरण न सुविधाएं
महेंद्रगढ़ का अस्पताल 55 बेड का है, भवन भी नया मिल गया है, पर सुविधाएं नहीं हैं। महेंद्रगढ़ के सब डिवीजनल अस्पताल में केवल डाक्टरों की ही कमी नहीं है, बल्कि सुविधाओं के नाम पर भी यहां मरीजों के साथ ज्यादती हो रही है। एक्सरे मशीन अक्सर खराब रहती है, अल्ट्रासाउंड की सुविधा है नहीं। दांत का एक्सरे बाहर से कराना पड़ता है। कोई सर्जन नहीं होने के कारण सर्जरी नहीं होती। दवाइयों के नाम पर भी खानापूर्ति की जा रही है। अक्सर मरीजों को बाहर की दवाइयां लेनी पड़ती हैं। इसी प्रकार के हालात कनीना और सतनाली में हैं।
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