नगर पालिका चेयरपर्सन के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव की बैठक तो होगी, लेकिन इसका रिजल्ट घोषित नहीं होगा। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अविश्वास प्रस्ताव के रिजल्ट पर रोक लगा दी है।
नगर पालिका चेयरपर्सन रीना गर्ग के लिए वर्ष 2018 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। अविश्वास प्रस्ताव से पहले तीन पार्षदों की सदस्यता को लेकर विवाद हो गया था। नपा चेयरपर्सन ने तीन पार्षदों की सदस्यता को हाई कोर्ट में चैलेंज किया। इन पाषर्दों की सदस्यता के बाद ही नगर पालिका चेयरपर्सन के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होना है। सिंगल बैंच से फैसला आने के बाद यह मामला हाई कोर्ट की डबल बैंच में चल रहा है। अगस्त में पार्षदों ने डीसी को आवेदन दिया। जिसमें अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुुलाने को लेकर अनुरोध किया। डीसी ने इस बारे में एसडीएम को बैठक बुलाने के निर्देश दिए। बैठक के लिए 14 सितंबर की तारीख तय कर दी गई। इसी बीच नगर पालिका चेयरपर्सन ने बैठक बुलाए जाने को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने के लिए दो बार पत्र लिखे। चेयरपर्सन ने इसे हाई कोर्ट की अवमानना बताया। साथ ही पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी। दस सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजीव शर्मा, हरेंद्र सिंह संधू की बैंच ने इस मामले की सुुनवाई की। जिसमें अदालत ने 14 सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव की बैठक बुलाए जाने पर रोक नहीं लगाई। अदालत ने अविश्वास प्रस्ताव के रिजल्ट पर रोक लगाई है। रिजल्ट की घोषणा उच्च न्यायालय के अगले निर्देशों के अनुसार ही होगी।
वर्जन
नगर पालिका की अविश्वास प्रस्ताव की बैठक 14 सितंबर को तय शेड्यूल के अनुसार होगी। उच्च न्यायालय ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई है। इसके रिजल्ट की घोषणा नहीं की जाएगी। रिजल्ट पर फैसला हाईकोर्ट ही लेगा।
आरके सिंह, उपायुक्त, महेंद्रगढ़।
वर्जन
अविश्वास प्रस्ताव की बैठक को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिस पर दस सितंबर को सुुनवाई हुई। अदालत ने निर्देश दिया है कि अविश्वास प्रस्ताव बैठक का रिजल्ट घोषित नहीं होगा। इस केस में अगली सुुनवाई 28 सितंबर को होनी है। दूसरी अदालत की एसडीएम, डीसी के खिलाफ अवमानना याचिका में अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।
रीना गर्ग, चेयरपर्सन, नगर पालिका, महेंद्रगढ़।
ऐसे होगा फैसला
इस समय नगर पालिका में 15 चुने हुए पार्षद हैं। जिसमें एक पार्षद सुरेंद्र बंटी निलंबित हैं। जिस कारण कुल 14 पार्षदों को ही मतदान का अधिकार होगा। चेयरपर्सन को हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ेगी। अगर 10 पार्षद 14 सितंबर को बैठक में पहुंचकर वोटिंग करेंगे तो चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाएगा। अगर 9 या इससे कम पार्षद पहुंचे तो अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा।
तीन साल से जर्जर सड़कों से गुजर रहे
नगर पालिका चेयरपर्सन तथा पार्षदों के बीच 2017 से ही टकराव शुरू हो गया था। जिस कारण शहर की गलियों, सड़कों के निर्माण कार्य पिछले तीन साल से अटके हुए हैं। शहर के प्रमुख बाजारों, गलियों में गहरे गड्ढे बने हुए हैं। जनप्रतिनिधियों के आपसी टकराव के कारण पिछले दो साल में एक भी टेंडर सिरे नहीं चढ़ाया जा सका।