बार एसोसिएशन नारनौल का कार्यकाल बढ़ाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर अधिवक्ता दो धड़ों में बंट गए हैं। बार के प्रधान व चुनाव अधिकारी पर 21 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाने वाले बार एसोसिएशन के प्रधान पद के दो उम्मीदवारों, पूर्व प्रधान मनीष वशिष्ठ सहित करीब दो दर्जन अधिवक्ता शनिवार को एक निजी होटल
में प्रेसवार्ता की। प्रधान पद के उम्मीदवार यशवंत यादव व राजपाल लांबा ने बताया कि बार का चुनाव करवाने के लिए नियुक्त किए गए चुनाव अधिकारी ओमप्रकाश यादव अपनी मनमानी करते हुए न केवल इस पद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे बल्कि लोगों को भी गुमराह कर रहे हैं। जबकि दो दिन पहले चुनाव अधिकारी व वर्तमान प्रधान ने इस राशि का लेखा जोखा देने व मानहानि का मामला दर्ज करने की बात कही थी।
यशवंत यादव व राजपाल लांबा ने कहा कि चुनाव अधिकारी बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने बार की बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव को बार कौंसिल चंडीगढ़ में भेजा है। इन दोनों प्रत्याशियों ने कहा कि अन्य सामाजिक संस्थाओं की भांति बार एसोसिएशन का भी एक संविधान बना हुआ है। जिसके नियमानुसार किसी भी चुनावी बैठक के लिए एक आम बैठक बुलानी होती है। इसके लिए कम से कम पांच दिन पहले बार के सदस्यों को सूचना देनी होती है और उसमें बैठक का एजेंडा स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव अधिकारी 14 सितंबर को जिस बैठक की बात कर रहे हैं वो केवल ऑनलाइन चुनाव के विषय में निर्णय लेने के लिए एक आवश्यक बैठक थी। इसमें चुनावी बैठक का कोई एजेंडा नहीं था। चुनाव अधिकारी ओमप्रकाश यादव ने क्या प्रस्ताव पारित करके बार काउंसिल को भेजा है, उसे अभी तक अधिवक्ताओं की जानकारी में भी नहीं लाया गया है।
प्रधान पद के प्रत्याशियों सहित सचिव प्रत्याशी योगेंद्र सोनी ने भी कहा कि चुनाव अधिकारी को प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद, कार्यकाल को बढ़ाने के बारे में बैठक बुलाने का कोई अधिकार नहीं था तथा ना ही उन्होंने इस बारे कोई सहमति दी थी। उन्होंने तत्काल इस पर अपना विरोध जता दिया था। राज्यमंत्री ओमप्रकाश यादव द्वारा घोषित 21 लाख रुपये की राशि बार एसोसिएशन के खाते में मई या जून में जमा हो गई थी। जब अप्रैल महीन में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और कार्यकारिणी का समय समाप्त होने के बाद 21 लाख रुपये को अनुचित तरीके से खर्च का अधिकारी कहां से आ गया। उन्होंने कहा कि प्रधान अशोक यादव व सचिव पवन यादव को इस राशि को खर्च करने का कोई विधिक तथा नैतिक अधिकार नहीं था, लेकिन फिर भी इन्होंने इस गलत तरीके से खर्च कर दिया। जो राशि उन्होंने उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद खर्च की है, वह अनुचित है।
एक सवाल के जवाब में पूर्व प्रधान मनीष वशिष्ठ ने कहा कि उनके कार्यकाल में तत्कालीन डिप्टी स्पीकर संतोष यादव ने 11 लाख रुपये की राशि बार एसोसिएशन को दी थी, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में उस राशि में से एक रुपये भी खर्च नहीं किया। उन्होंने कहा कि पिछले 2 वर्षों में बार एसोसिएशन ने करीब 32 लाख रुपये का सरकारी फंड को खर्च कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी फंड को खर्च करने के बाद, उसका उचित उपयोग सर्टिफिकेट उपायुक्त को देना आवश्यक होता है, जिस पर न्यायालय तथा प्रशासन से जुड़े दो सरकारी अधिकारियों के हस्ताक्षर भी आवश्यक होते हैं। इस अवसर पर पूर्व उप प्रधान आशीष चौधरी, पूर्व उप प्रधान सुभाष सैनी, महावीर गुर्जर, महेंद्र खण्डेलवाल, दीपेंद्र गौड़, कर्ण सिंह, मुकेश निर्मल, अजय पांडे, रामचंद्र सैनी, हरीश सैनी, कर्णसिंह सैनी, देवेंद्र यादव, कृष्ण कुमार सैनी, विजय सैनी, मांगे राम सैनी, ललित शर्मा, महेश दीक्षित सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे।
लड्डू किसी के मंगवाए, पद दे दिया किसी को
नारनौल। नारनौल बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के कार्यकाल बढ़ाने के मुद्दे पर प्रत्याशियों द्वारा शनिवार को बुलाई गई पत्रकारवार्ता में पुस्तकालयाधीश के पद के लिए एक ही नामांकन होने के कारण नियुक्त हो चुके महावीर गुर्जर एडवोकेट ने कहा कि उसके साथ तो बहुत हैरानी भरा कारनामा हुआ है। महावीर गुर्जर ने कहा कि चुनाव अधिकारी ने उनके निर्विरोध निर्वाचित हो जाने पर उनसे मिठाई के लिए एक हजार रुपये भी लेकर मिठाई मंगवा ली थी, किंतु जब उन्हें पता चला कि बार में कोई बैठक करके पुरानी कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ा दिया है तो उन्होंने अपने आप को ठगा से महसूस किया।