फोटो नंबर-02गोष्ठी में ऑनलाइन भाग लेते कविगण। स्रोत-स्वयं
नारनौल। इंद्रप्रस्थ लिट्रेचर फेस्टिवल, हरियाणा के पटल पर 60वीं राष्ट्रीय कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें देश-भर के लगभग दो दर्जन कवियों-कवयित्रियों ने सहभागिता की।
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. चन्द्रमणी ब्रह्मदत्त और प्रो. परमानन्द दीवान के सान्निध्य व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कृष्णा आर्या के संयोजन में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार व हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला की सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. रामनिवास मानव मुख्य अतिथि थे। वहीं अकादमी की पूर्व निदेशक डॉ. मुक्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
लगभग दो घंटों तक चली इस गोष्ठी का शुभारम्भ कोकिला-कंठी दर्शना पाहवा ने मनमोहक सरस्वती-वंदना से किया, वहीं तिनसुकिया (आसाम) से पधारी विशिष्ट कवयित्री डॉ. निशा नंदिनी भारतीय ने देखो सांझ ढल रही है, मिलकर दीप लौ जलाओ गीत प्रस्तुत किया। डॉ. मुक्ता ने मन-मंदिर में जोत जगाकर तेरे दर्शन पाऊं। तुम्हीं बताओ मेरे राम, मैं किस विध तुम्हें रिझाऊं गीत से माहौल को राममय बना दिया। मुख्य अतिथि डॉ. रामनिवास मानव ने भारत को उत्सवधर्मी देश बताते हुए रोशन हो पाये अगर जीवन की कंदील, खुशियों के बिखरें सदा फूल, बताशे, खील कहकर लोक-मंगल की कामना की।