नारनौल। भारत सरकार द्वारा देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत निक्षय मित्र बनाए जा रहें हैं। निक्षय मित्र द्वारा टीबी रोगी को पोषण सामग्री मुहैया करवाकर उनकी आर्थिक मदद की जाती है।
योजना के तहत इच्छुक व्यक्ति अपनी इच्छानुसार 6 माह, 1 वर्ष, 2 वर्ष और 3 वर्ष की अवधि के लिए निक्षय मित्र बन सकते हैं। निक्षय मित्र इच्छानुसार एक या एक से अधिक रोगियों को गोद ले सकते हैं और उनकी पोषण सामग्री का खर्च वहन कर सकते हैं।
एक मरीज को दी जाने वाली पोषक सामग्री किट का खर्च 500 रुपये प्रतिमाह होता है। इसमें 3 किलो अनाज, 1.5 किलो दालें या मूंगफली, 250 ग्राम खाद्य तेल और पाउडर दूध जैसे पोषक खाद्य पदार्थ शामिल रहते हैं, ताकि टीबी से ग्रसित मरीज को भरपूर मात्रा में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मिल सकें। खाद्य सामग्री के अलावा निक्षय मित्र टीबी से ग्रसित मरीज को उपचार के दौरान होने वाले खर्च में भी सहायता प्रदान कर सकते हैं। निक्षय मित्र बनने वाले अधिकतर लोग 6 माह की अवधि और सहायता के लिए खाद्य सामग्री किट का चुनाव करते हैं।
30 निक्षय मित्र 55 मरीजों को दे रहें सहायता
महेंद्रगढ़ जिले में अभी 1250 टीबी से ग्रसित मरीजों का उपचार चल रहा है। वहीं अप्रैल 2024 से अक्तूबर 2024 तक गत 7 माह में 30 लोग निक्षय मित्र बने हैं। इनके द्वारा 55 मरीजों को प्रतिमाह पोषण सामग्री मुहैया करवाई जा रही है। निक्षय मित्र बनने के लिए इच्छुक व्यक्ति https://communitysupport.nikshay.in पर लॉग इन कर व नजदीकी क्षय रोग केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
टीबी से ग्रसित मरीजों के बेहतर उपचार के लिए सरकार द्वारा कई योजनाओं को चलाया जा रहा है। निक्षय मित्र बनकर लोग टीबी से ग्रसित मरीजों को खाद्य सामग्री सहित अन्य सहायता प्रदान कर सकते हैं, ताकि मरीज को आर्थिक रूप से सहायता मिल सके। क्षेत्र के लोगों से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा लोग निक्षय मित्र बनें और टीबी मुक्त भारत अभियान में भाग लेकर टीबी से ग्रसित मरीजों को सहायता प्रदान करें।
डॉ. नवीन कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी, नारनौल।