नारनौल। 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्र व्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए जिला कार्यकर्ता 9 जनवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी फेडरेशन व महासंघों के राष्ट्रीय सम्मेलन दिल्ली में भाग लेंगे। एआईयूटीयूसी जिला प्रधान मास्टर सुबे सिंह ने श्रमिक विरोधी व कॉर्पोरेट परस्त चार लेबर कोड को लागू करने की घोषणा को श्रमिक हितों के खिलाफ बताया है।
उन्होंने बताया कि 8 घंटे की जगह 12 घंटे कार्य दिवस, मजदूरों का यूनियन बनाने, उसे पंजीकृत कराने, अपने ढंग से चलाने व अपनी सामूहिक मांगे मनाने के लिए हड़ताल करने के काम को बहुत ही कठिन कर दिया है।
वहीं 299 तक के श्रमिक संख्या वाले उद्योगों में नियुक्ताओं को मजदूरों की छंटनी करने, ले-ऑफ, तालाबंदी व कारखाना बंदी मर्जी अनुसार करने का अधिकार दे दिया है। स्थाई किस्म के काम को ठेके पर अथवा शॉर्ट टर्म के तहत कराने का भी अधिकार दे दिया। इससे उद्योगपति स्थाई भर्ती नहीं करेंगे।
महिलाओं को रात में काम पर बुलाने का अधिकार भी मालिकों को दे दिया है। श्रमिक न्याय पाने के लिए अब सीधा,अपनी मर्ज़ी से कोर्ट में नहीं जा सकेंगे। इसी तरह के अनेक ऐसे प्रावधान इन लेबर कोड में लाए गए हैं जिन से भारत के मजदूर को पूंजीपतियों के गुलाम बनाने का रास्ता खोलने जैसे हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र व्यापी हड़ताल के माध्यम से जोरदार मांग उठाई जाएगी कि चारों लेबर कोड्स तुरंत रद्द किए जाएं। रद्द किए 29 श्रम कानून बहाल हों, उन्हें संशोधित करके मजदूर हितों में समृद्ध करने।
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों-विभागों व संपत्तियों को पूंजीपतियों को देना बंद करने। न्यूनतम वेतन 26000 रुपये मासिक घोषित करने। पुरानी पेंशन बहाल, एनपीएस व यूपीएस रद्द करने आदि शामिल हैं।