फोटो नंबर-02भागवत कथा में मौजूद भक्तजन। स्त्रोत-आयोजक
नारनौल। समीपवर्ती गांव डोहर खुर्द में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य बजरंग शास्त्री ने श्री कृष्ण का वर्णन किया। आचार्य ने कृष्ण जन्म के बधाई के गीत गाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण का जन्म संसार के मरण धर्मा लोगों को शिक्षा देने और दुष्टों के संहार एवं संतों ब्राह्मणों की रक्षा के लिए हुआ। उन्होंने बताया कि जब जब धर्म की हानि होती है और अधर्म को बढ़ावा मिलता है, तब तब प्रभु विभिन्न अवतार लेकर पृथ्वी पर आते हैं। आचार्य ने बताया भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म मथुरा में हुआ और वसुदेव जी भगवान श्री कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा के महल में माता यशोदा के पास छोड़कर वहां से योगमाया को अपने साथ मथुरा ले आते हैं। जैसे ही वे कारागृह में पहुंचे तो जो ताले अपने आप बंद हो गए और पहरेदार जग गए। उन्होंने बताया कि जीव जब भगवान का आश्रय लेता है तो बंधन से छूट जाता है और माया का आश्रय लेता है तो बंधन में बंध जाता है। सभी ब्रजवासी माता यशोदा के महल में बधाई देने के लिए आने लगे और नंद बाबा ने लाला के जन्म का समाचार सुना तो खूब बधाई लुटाई।