क्षेत्र में रविवार को गोवर्धन पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने अपने घरों में गोबर से गोवर्धन बनाया और उसकी पूजा अर्चना की। वहीं कोरोना संक्रमण के चलते अबकी बार कई मंदिरों में अन्नकूट का भंडारा नहीं लगा, लेकिन शहर में मुख्य मंदिरों समेत कई गांवों के मंदिरों में अन्नकूट के प्रसाद का वितरण किया गया।
इस मौके पर लोगों ने अपने घरों में गोवर्धन की पूजा अर्चना की। गोवर्धन के अवसर पर शहर के मंदिरों में अन्नकूट के प्रसाद का वितरण किया गया। कई मंदिरों में अन्नकूट का भंडारा भी लगाया गया। शहर के मोहल्ला नई सराय स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, मोड़ावाला मंदिर, बाबा जेठू मंदिर समेत कई मंदिरों ने अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया गया।
वहीं, कई स्थानों पर अन्नकूट के भंडारे का भी आयोजन किया। अन्नकूट का प्रसाद केवल मंदिरों में भंडारे के रूप में नहीं, बल्कि घरों में ले जाने के लिए भी दिया जाता है। इस कारण लोग अपने अपने बर्तनों में प्रसाद को डलवाकर घरों में भी ले गए। शहर में लगभग सभी मंदिरों में चावल, बाजरा, मिक्स सब्जी, मूंग व कढ़ी के अन्नकूट का प्रसाद बनता है। इस कारण शहर में किसी भी घर में खाना नहीं बनता, सब मंदिरों से आए अन्नकूट का ही प्रसाद ग्रहण करते हैं।
हिंदू शास्त्रों में गोवर्धन की पूजा व अन्नकूट का प्रसाद की बड़ा महत्व
गोवर्धन की पूजा व अन्नकूट प्रसाद का हिंदू शास्त्रों में बड़ा महत्व है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के अवतार के बाद अन्नकूट और गोवर्धन पूजा की शुरुआत हुई। उक्त बातें राज्य मंत्री ओमप्रकाश यादव ने रविवार को शहर के रविदास मंदिर में अन्नकूट का प्रसाद ग्रहन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
यादव ने कहा कि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार एक बार वर्षा के देवता इंद्र भगवान को अभिमान हुआ और इसी अभिमान में 7 दिन तक लगातार बारिश करने लगे। इससे गोकुल की जनता में तबाही आनी शुरू हो गई तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनके अहंकार को चूर चूर करने और जनता की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को ही उंगली पर उठा लिया। गोकुल के सभी पशु, पक्षी एवं मानव जन उस पर्वत के नीचे आ गये इससे गोकुल वासियों को कोई नुकसान नहीं हुआ। जब इसकी जानकारी इंद्र देवता को हुई तो इंद्र ने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि उसके बाद भगवान कृष्ण ने गोकुल वासियों से कहा कि आप सब लोग गोवर्धन की पूजा करें। उसी दिन के बाद से गोवर्धन की पूजा और अन्नकूट का प्रसाद इस दिन बनाने लगे। मंत्री ओमप्रकाश यादव ने शहर के विभिन्न मंदिरों में आयोजित अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर महाराज बालकनाथ, मंगल रईस, सुरेश, रोहतास चेयरमैन, राजू कमानिया, मदनलाल गोगिया व नगर पार्षद हंसराज सहित अनेकों लोग उपस्थित थे।