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Mahendragarh-Narnaul News: नारनौल पीसी-पीएनडीटी टीम ने भ्रूण जांच गिरोह का किया भंडाफोड़

Fri, 01 Aug 2025 12:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो 5पकड़े गए आरोपी साथ में पीसी-पीएनडीटी टीम।स्रोत स्वास्थ्य विभाग
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नारनौल। जिले में लिंगानुपात में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। अब सिविल सर्जन कार्यालय नारनौल की गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) टीम ने भ्रूण हत्या से संबंधित गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई बुधवार देररात हरियाणा और राजस्थान राज्य के संयुक्त प्रयास से राजस्थान के झुंझुनू जिले के शिमला गांव में की गई।
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टीम को सूचना मिली कि अमित नामक एक व्यक्ति ने एक गर्भवती को लिंग परीक्षण के लिए गांव बदोपुर में बुलाया था। एक फिक्सर के माध्यम से गांव शिमला जिला झुंझुनू में जांच की व्यवस्था की गई थी। जांच के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। इस दौरान एक महिला को डिकॉय ग्राहक के रूप में टीम के साथ भेजा गया।
टीम रवि निवासी बसावता जिला झुंझुनू , भारत शर्मा निवासी रामनगर जिला अलवर और उमेश निवासी अचीना जिला चरखी दादरी को पकड़ने में कामयाब रही। वहीं नारनौल का अमित शर्मा निवासी बदोपुर मौका पाकर भाग गया। इन पर पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। एक कैमरा, मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और अन्य सामान सहित जब्त कर लिया गया। टीम ने आरोपियों से 26000 रुपये भी बरामद किए। डिकॉय ग्राहक के रूप में भेजी गई महिला से रवि ने जांच उपरांत यह बताया कि गर्भ में लड़की पल रही है। उन्होंने महिला से गर्भपात करवाने के लिए सहमति जताई।
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इंसेट
रवि पर पहले से चार मुकदमे राजस्थान में हैं दर्ज
पीसीपीएनडीटी टीम ने आरोपियों को पकड़ने के बाद जिला झुंझुनू की पीसीपीएनडीटी टीम को सूचना दी। इसके बाद झुंझुनू की टीम ने नारनौल टीम का साथ देते हुए कार्रवाई की। टीम को यह भी पता चला कि यह गिरोह कई वर्षों से राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में संलिप्त है। रवि पर राजस्थान में 4 मुकदमे भी दर्ज हैं। गिरफ्तार आरोपियों को नारनौल पुलिस गिरफ्तार कर नारनौल में न्यायालय में वीरवार को पेश किया।



जिला स्तर पर गठित पीसीपीएनडीटी निरीक्षण टीम नियमित निगरानी करती है। आमजन से भी यह अपील की जाती है कि वे ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सिविल सर्जन कार्यालय को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। उन्हें कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाएगा।-डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन नारनौल।
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